बारिश नहीं सह पाया फोरलेन!

 

सिवनी में फोरलेन का निर्माण कार्य जिस तरह से किया जा रहा है और उसके रखरखाव के कार्य पर भी जिस तरह से लापरवाही बरती जा रही है, उसी से मुझे शिकायत है।

कुरई घाट का निर्माण कार्य आरंभ हो चुका है। इस मार्ग पर पूर्व के वर्षों में लंबा जाम लगता रहा है और कमोबेश वर्तमान में भी ज्यादा हालात नहीं बदले हैं जबकि परिस्थितियां भिन्न हो चुकी हैं। सड़क निर्माण कंपनी यदि अपने ठेकेदार से ईमानदारी पूर्वक कार्य करवाये तो इस मार्ग पर जाम लगने का अब कोई कारण शेष नहीं रह गया लगता है।

ऐसा लगता है जैसे इस मार्ग पर जाम लगने के पीछे किसी का निजि हित छुपा हो, वरना क्या कारण है कि लंबे समय से और बारिश के दिनों में प्रमुख रूप से इस मार्ग पर जाम लगता रहा लेकिन किसी ने भी ठोस हल निकालने का प्रयास नहीं किया। बहरहाल फोरेलेन का जो हिस्सा बनकर तैयार हो गया है वह वर्तमान में हुई तेज बारिश को झेल नहीं पाया लगता है। कई स्थानों पर गड्ढे उभर आये हैं जो विवादित कार्यप्रणाली को उजागर करने के लिये पर्याप्त माने जा सकते हैं।

कुछ स्थान तो ऐसे भी हैं जहाँ पहाड़ों से चट्टाने फिसलकर इस मार्ग पर आ गिरती हैं। इन चट्टानों के गिरने के कारण अभी तक कोई गंभीर दुर्घटना घटित नहीं हुई है लेकिन सवाल उठना लाजिमी है कि ये चट्टाने कैसे सड़क पर आकर गिर रहीं हैं। इस सड़क से गुजरते समय जब इन पहाड़ों पर नज़र जाती है तो तकनीकि रूप से अंजान व्यक्ति भी बता सकता है कि सड़क बनाने के लिये पहाड़ियों को अत्यंत लापरवाही पूर्वक काटा गया है जिसमें सुरक्षा को तवज्जो नहीं दी गयी है।

शायद यही कारण भी है कि पहाड़ी से खिसलने वाली चट्टान या पत्थर आदि सीधे सड़क पर आकर गिरते हैं। यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है लेकिन इस भयावह स्थिति से निजात दिलाने के लिये अभी तक कोई कदम नहीं उठाये गये हैं जिसके कारण लोगों में निराशा होना स्वाभाविक ही है। शासन प्रशासन से अपेक्षा ही की जा सकती है कि उसके सड़क का रखरखाव उचित तरीके से करवाया जाये और तभी टोल टैक्स भी वसूला जाये। कुरई घाट से गुजरते वक्त वाहन चालकों के मन में यह डर न रहे कि आगे जाम हो सकता हैै।

संजय पाण्डे