खातरकर को लेकर काँग्रेस में रार हुई तेज!

 

 

आखिर कौन है जो बचा रहा प्रभारी सीईओ रहीं बीडीओ को!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जनपद पंचायत सिवनी में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहीं सुमन खातरकर के द्वारा सीईओ के पद पर न रहते हुए भी एक करोड़ 68 लाख रूपये के भुगतान का मामला अब तूल पकड़ता दिख रहा है। जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में यह मामला छाया रहा।

जनपद पंचायत के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि शुक्रवार को हुई जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में रखे गये इस आशय के प्रस्ताव पर चर्चा के उपरांत यह बात सामने आयी कि तत्कालीन सीईओ सुमन खातरकर के द्वारा सीईओ के पद पर न रहते हुए भी एक करोड़ 68 लाख रूपये के फण्ड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) कर दिया गया। यह कार्य उनके द्वारा सीईओ के संज्ञान में लाये बिना ही किया गया।

सूत्रों ने आगे बताया कि बैठक में जनपद अध्यक्ष ने बताया कि तत्कालीन सीईओ रहीं सुमन खातरकर के द्वारा नवागत सीईओ के द्वारा बैंक में हस्ताक्षर भेजने के बाद भी गलत तरीके से बैंक को गुमराह करते हुए यह लिखकर दिया गया कि नये सीईओ के हस्ताक्षर मान्य न किये जायें, क्योंकि उन्हें (सुमन खातरकर) को हाई कोर्ट से स्थगन मिल गया है, जबकि उन्हें स्थगन नहीं मिला था।

सूत्रों ने बताया कि सदन में यह बात भी सामने आयी कि 15 अगस्त के उपरांत मूलतः विकास खण्ड अधिकारी (बीडीओ) के पद पर पदस्थ सुमन खातरकर 15 अगस्त के उपरांत कार्यालय नहीं आयीं हैं। इसके बाद भी उनके द्वारा 24 से 26 अगस्त के मध्य एक करोड़ 68 लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में सर्व सम्मति से यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं मूलतः विकास खण्ड अधिकारी सुमन खातरकर के खिलाफ इस मामले में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करायी जाये। इसके उपरांत इस कार्यवाही से युक्त एक पत्र नगर कोतवाल को भी भेजा गया।

सूत्रों ने आगे बताया कि इस मामले में काँग्रेस के अंदर ही अंदर असंतोष का लावा लंबे समय से खदबदाता दिख रहा है। काँग्रेस का एक धड़ा बीडीओ सुमन खातरकर को बचाने की जुगत में दिख रहा है तो दूसरा धड़ा उनकी सिवनी से बिदाई को आतुर दिख रहा है।

सूत्रों ने बताया कि इसी बीच सीईओ के पद पर न रहते हुए भी बतौर सीईओ एक करोड़ 68 लाख रूपये के भुगतान का मामला अब बीडीओ सुमन खातरकर के गले की फांस बनता दिख रहा है। इस मामले में अब लोग यह चर्चा करते भी दिख रहे हैं कि मामला आईने की तरह साफ होने के बाद भी वे कौन से नेता हैं जो सुमन खातरकर को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं!