संल्लेखना के बाद संत विद्यानंद महाराज का समाधिमरण

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

इंदौर (साई)। दिगंबर जैन समाज के वयोवृद्ध संत आचार्य विद्यानंद महाराज का समाधिमरण रविवार को दिल्ली स्थित कुंदकुंद भारती में हो गया।

उन्होंने गुरुवार को यम संल्लेखना धारण कर अन्न्-जल के साथ सारी पदवी त्याग दी थी। उनके देवलोकगमन के समय 48 साधु-संत उनके पास मौजूद थे। उनके दर्शन के लिए देशभर के गुरु भक्तों का तांता पिछले चार दिनों से लगा हुआ था।

गुरु भक्त सुशील पांड्या ने बताया कि आचार्य ने जैन समाज को पंचरंगी ध्वजा और तीन लोक के नक्शे से पहचान दिलाने का काम किया। उन्हें जैन शास्त्र कंठस्थ थे। दिगंबर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी के अनुसार आचार्य का जन्म 1925 में हुआ। क्षुल्लक दीक्षा उन्होंने 1946 में ली।

आचार्य चार बार इंदौर आए । पहली बार 1972, दूसरी बार 1979 और फिर 1984 में आए थे। वे जैन तीर्थ गोम्मटगिरि स्थापना महोत्सव में भी शामिल हुए थे।

उन्होंने इंदौर में तीन चातुर्मास किए। दिगंबर जैन समाज के संजीव जैन ने बताया कि दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, पंच लश्करी गोठ और सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा 23 सितंबर को सुबह 9.45 बजे रामाशाहा दिगंबर जैन मंदिर में विनयांजलि सभा आयोजित की जाएगी।

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