गाँधीजी के विचार अनेक विचारों का सम्मिश्रण : चिले

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। गाँधीजी की 150वी जयंति के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए पीजी कॉलेज के प्राचार्य एस.के. चिले ने कहा कि प्रासंगिकता पर विचार करने के पूर्व यह जानना आवश्यक है कि गाँधी के व्यक्तित्व एवं विचार दर्शन का मूल आधार क्या है।

उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व की दृष्टि से विचार करें तो गाँधी ी राजनीतिज्ञ हैं, दार्शनिक हैं, सुधारक हैं, आचारशास्त्री हैं, अर्थशास्त्री हैं, क्रान्तिकारी हैं। समग्र दृष्टि से गाँधी के व्यक्तित्व में इन सबका सम्मिश्रण है। मगर इस व्यक्तित्व का मूल आधार धार्मिकता है।

इस अवसर पर प्रो.सुरेश बाटड़ ने कहा कि गाँधी का धर्म परंपरागत धर्म नहीं है। गाँधी का धर्म विभाजक दीवारें खड़ी नहीं करता। गाँधी का धर्म बाँटता नहीं है। गाँधी के धर्म का अर्थ है – ईश्वरमय जीवन जीना। ईश्वर का मतलब किसी रूप साँचे में ढला देवता नहीं है। ईश्वर का अर्थ है सत्य एवं सत्याचरण। गाँधीजी ने बार – बार कहा था कि सत्य के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है। इस ईश्वर की या इस सत्य की प्राप्ति तथा अनुभव का आधार है – प्रेम एवं अहिंसा।

डॉ.रवि शंकर नाग ने कहा कि धर्म मनुष्य की पाश्विक प्रकृति को बदलने का उपक्रम है। धर्म मनुष्य की वृत्तियों के उन्नयन की प्रक्रिया है। धर्म एक समग्र सत्य साधना है। धर्म अन्तःकरण के सत्य से चेतना का संबंध स्थापित करना है। डॉ.राजेश ठाकुर ने कहा धर्म वह पवित्र अनुष्ठान है जिससे चित्त का, मन का, चेतना का परिष्कार होता है। धर्म वह तत्व है, जिसके आचरण से व्यक्ति अपने जीवन को चरितार्थ कर पाता है। धर्म मनुष्य में मानवीय गुणों के विकास की प्रभावना है, धर्म सार्वभौम चेतना का सत्संकल्प है।

प्रो.सतेन्द्र शेण्डे ने कहा कि गाँधी के पूर्व भारतीय आध्यात्मिक साधना परंपरा में प्राप्ति का लक्ष्य था – मोक्ष प्राप्त करना, निर्वाण प्राप्त करना, बैकुण्ठ प्राप्त करना, भगवान की समीपता प्राप्त करना। गाँधी की प्राप्ति का लक्ष्य है कि मनुष्य मात्र की निरन्तर सेवा करते रहना।

प्रो.अनीता कुल्हाड़े ने कहा कि गाँधीजी का भारत के संदर्भ में तात्कालिक उद्देश्य था कि भारत की स्वाधीनता। भारत की सामान्य जनता में स्वाभिमान को जगाने, स्वाधीनता प्राप्ति के लिये सामूहिक चेतना का निर्माण करने, भारतीय राष्ट्रीयता के नवउत्थान का शंखनाद करने तथा दासता की श्रृंखलाओं को चूर-चूर करने का काम जिन लोगों ने किया उनको प्रेरणा देने का सबसे अधिक काम राष्ट्रपिता ने किया।

आयोजन के संचालक डॉ.मान सिंह बघेल एवं सकीना खान की उपस्थिति में कार्यक्रम में गाँधीजी के विचारों की प्रासंगिकता एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

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