कलाम का हुआ था 1915 में निधन!

 

 

 

 

12वीं की हिंदी की किताब में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का निधन 1915 छाप दिया

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए शासन की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के मंत्री से लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विदेश दौरे पर जा रहे हैं। विदेश के स्कूलों की तर्ज पर यहां के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की कवायद भी तेजी से चल रही है।

वहीं, माध्यमिक शिक्षा मण्डल बोर्ड की 12वीं की समान्य हिंदी की किताब में छपाई में गड़बड़ी सामने आई है। इस किताब में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन परिचय में निधन की तारीख गलत छाप दी गई है। अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को हुआ था, जबकि किताब में 1915 छाप दिया गया है।

बच्चों के बीच मिसाइलमैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में गलत जानकारी पढ़ने को मिल रही है। 2019-20 के लिए समान्य हिंदी (मकरंद) की किताब श्मेरे सपनों का भारतश् में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के पाठ में जीवन परिचय में गलती की गई है। वहीं, राजधानी के कई सरकारी स्कूलों में 2019-20 की किताबें नहीं पहुंची हैं। पुराने सत्र की किताबों से ही विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

2015 के बदले 1915 छाप दिया : पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का देहांत 27 जुलाई 2015 को हुआ था, लेकिन किताब में 1915 छाप दिया गया है। किताबें वितरित हुए चार माह हो गए। चार माह से बच्चे इसे गलत ही पढ़ रहे हैं। जब स्कूलों की ओर से राज्य शिक्षा केंद्र में इसकी जानकारी पहुंची तो इसमें संशोधन के लिए पत्र जारी किया गया। लेकिन स्कूलों से किताबें वापस नहीं मंगाई गईं, बल्कि संशोधन कर पढ़ाने के लिए कहा जा रहा है।

यह गलती सिर्फ 2019-20 की किताबें में ही नहीं की गई है, बल्कि 2017-18 में उनके निधन का वर्ष ही नहीं छापा गया था। पाठ को पढ़ने पर ऐसा लगेगा जैसे कि अब भी वे जीवित हैं और काम कर रहे हैं। इस तरह की गलतियां सामने आने से शिक्षकों को पढ़ाने में परेशानी हो रही है।

स्कूलों में बच्चों को कुछ विषयों की पुरानी किताबों से पढ़ाई करनी पड़ रही है। विज्ञान, हिंदी, सोशल साइंस की इस सत्र की नई किताबें बच्चों को नहीं मिल पाई हैं। वहीं, अंग्रेजी माध्यम की भी कई किताबें अभी तक स्कूलों में नहीं पहुंची हैं।

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