इसलिये मनाया जाता है गुड़ी पड़वा . . .

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। छः अप्रैल को विक्रम संवत् 2076 प्रारंभ होगा। इसी दिन सृष्टि की शुरूआत हुई थी। हिन्दु कैलेण्डर भी इसी दिन से आरंभ होता है। इसके अलावा इस शुभ दिन ही सिंधी नववर्ष चेटीचण्ड उत्सव भी धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि चैत्र नवरात्र भी इसी दिन से आरंभ होती है।

कितनी पुरानी है हमारी पृथ्वी : मान्यता के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की के लिये इसी दिन को चुना था। इसीलिये विक्रम संवत् के नये साल का आरंभ भी इसी दिन होता है। एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 116 वर्ष पूर्व इसी दिन ब्रह्माजी ने जगत की रचना की थी। इसी दिन दुनिया में सबसे पहला सूर्याेदय हुआ था। भगवान ने इस प्रतिपदा तिथि को सर्वाेत्तम तिथि कहा था। इसलिये इसको सृष्टि का प्रथम दिन भी कहते हैं।

सृष्टि के पहला दिन के कारण गुड़ी पड़वा मनाया जाता है। इस दिन संवत्सर की पूजा, चौत्र नवरात्र में घटस्थापन, ध्वजारोपण आदि विधान होते हैं। चौत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा बसन्त ऋतु में आती है। इस ऋतु में पूरी सृष्टि पर सौंदर्य की छटा बिखरती है।

विजय पताका है गुड़़ी : गुड़ी का अर्थ विजय पताका से है। मान्यता है कि इस दिन शालिवाहन नामक कुम्हार के पुत्र ने मिट्टी के सैनिकों का निर्माण कर एक सेना बना दी थी और उस पर पानी छिड़ककर प्राण फूंक दिये थे। इसके बाद उस मिट्टी की सेना ने शक्तिशाली दुश्मनों को पछाड़ दिया था और विजय पा ली थी। इसी विजय के प्रतीक के रूप में शालिवाहन की शुरूआत मानी गयी है।

गुलामी की निशानी : महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और कश्मीर में हिन्दुओं के लिये नव वर्ष एक महत्वपूर्ण उत्सव है। यह पर्व सभी को एक संस्कृति से जोड़ता है। बताया जाता है कि अंग्रेजों की गुलामी का ही नतीजा है कि आज कई लोग गुड़ी पड़वा को भूलते जा रहे हैं और जनवरी से अंग्रेजी कैलेण्डर को ही नया वर्ष मानने लगे हैं।

भारतीय हैं तो गुड़ी पड़वा मनायें : लोगों का कहना है कि सभी को बताना चाहिये कि भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत् है, जो इस वर्ष छः अप्रैल से आरंभ होने वाला है। नये साल में भी 12 माह होते हैं। चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *