कलेक्टर का आदेश रद्दी के हवाले!

 

 

0 कॉपी, किताब, गणवेश में लुटेंगे . . . 10

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। नये शिक्षण सत्र के आगाज होने के बाद भी जिले में संचालित अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं के द्वारा पालकों की जेब तराशी जमकर की जा रही है। इस मामले में जिला कलेक्टर के आदेश को निजि शैक्षणिक संस्थाओं के द्वारा रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया गया प्रतीत हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर के हस्ताक्षरों से 30 मार्च को जारी आदेश में कहा गया था कि अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं के द्वारा मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अंतर्गत एनसीईआरटी की किताबों को न चलाया जाकर महंगी और अन्य निजि प्रकाशकों की किताबों को चलाया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि दुकानदारों के द्वारा पालकों या विद्यार्थियों को एक दो किताब खरीदने की बजाय पूरा सेट खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है।

इस आदेश में कहा किया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा 30 अप्रैल 2015 को अशासकीय शिक्षण संस्थाओं के लिये मार्गदर्शी सिद्धांत तय किये गये हैं। इन सिद्धांतों का उल्लंघन दण्डनीय होगा।

इस आदेश के अनुसार जिले के सभी पुस्तक विक्रेताओं तथा शाला के गणवेश विक्रेताओं को इस आशय की सूचना अपनी दुकान पर लगानी होगी और उसका पालन करना आवश्यक होगा जिसमें यह उल्लेख होगा कि कोई भी व्यक्ति कितनी भी संख्या में किताबें और गणवेश खरीद सकता है। उसे पुस्तकों या गणवेश का पूरा सेट खरीदने की आवश्यकता नहीं है।

इस आदेश में जिला कलेक्टर ने साफ तौर पर कहा है कि प्रत्येक विद्यालय को सूचना पटल पर उन दुकानों के नाम प्रदर्शन करना आवश्यक होगा जहाँ विद्यालय से संबंधित पुस्तकें या गणवेश उपलब्ध हैं। इसके अलावा यह भी स्पष्ष्ट करना होगा कि किसी भी विशेष दुकान से इन सामग्री को क्रय करने की कोई बाध्यता नहीं है।

इस आदेश में जिला कलेक्टर के द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रत्येक विद्यालय को अपने विद्यालय में चलने वाली पुस्तकों की सूची, लेखक एवं प्रकाशक के नाम तथा मूल्य भी सूचना पटल पर प्रदर्शित करने होंगे। इसकी एक प्रति जिला शिक्षा अधिकारी को भी उलब्ध कराने की बात कही गयी है।

बताया जाता है कि इसके बाद भी अब तक जिले की अनेक शैक्षणिक संस्थाओं के द्वारा इस आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया है। अनेक शालाओं और दुकानों में इस तरह की सूचना प्रदर्शित नहीं की जा रही है, जिससे पालकों को लग रहा है कि इस आदेश को निजि शैक्षणिक संस्थानों के संचालकों के द्वारा रद्दी की टोकरी के हवाले ही कर दिया गया है।

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