मनमाने गति अवरोधक बने हादसों का कारण!

 

 

नियम कायदों को धता बता बना दिये शहर में गति अवरोधक

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। जिले में किसी सड़क पर दो और चार पहिया वाहन चालक फर्राटे भर रहे हैं तो किसी सड़क पर एक दो नहीं आधा दर्जन गति अवरोधक बना दिये गये हैं। नगर पालिका की मदमस्त चाल के चलते इन अमानक गति अवरोधक हादसों का कारण बनते जा रहे हैं।

शहर में अनेक मार्ग इस तरह के हैं जहाँ पालिका के द्वारा मनमाने तरीके से गति अवरोधक बना दिये गये हैं। पुलिस अधीक्षक निवास से पॉलीटेक्निक कॉलेज जाने वाले मार्ग पर बने दो गति अवरोधक इतनी ऊॅचाई के हैं कि चार पहिया वाहनों का चेचिस इनसे टकरा जाता है।

इसी तरह एसपी बंग्ले से अपर बैनगंगा कॉलोनी मार्ग पर बनाये गये गति अवरोधकों का विरोध होने पर इन्हें बाद में हटा दिया गया था। सर्किट हाऊस चौराहे पर कुछ साल पहले बने गति अवरोधक गायब हो चुके हैं। शहर में प्रभावशाली लोगों के द्वारा अपने – अपने घरों के आसपास स्पीड ब्रेकर बनवा लिये गये हैं, भले ही वहाँ यातायात का दबाव न के बराबर ही रहता हो।

यह हैं ब्रेकर के नियम : भारतीय सड़क काँग्रेस यानि आईआरसी के दिशा – निर्देशों के मुताबिक एक आदर्श स्पीड ब्रेकर की ऊँचाई 10 सेंटीमीटर, लंबाई 3.5 मीटर और वृत्ताकार क्षेत्र यानी कर्वेचर रेडियस 17 मीटर होना चाहिये। साथ ही ड्राईवर को सचेत करने के लिये स्पीड ब्रेकर आने से 40 मीटर पहले एक चेतावनी बोर्ड लगा होना चाहिये।

इसके साथ ही 16 सितंबर 2013 को पुलिस अधीक्षक के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए अनाधिकृत एवं मानकों के विपरीत बने गति अवरोधकों की जानकारी चाही गयी थी। इस निर्देश में यह भी कहा गया था कि इस पत्र के बाद बनने वाले गति अवरोधकों को निर्धारित मापदण्ड के हिसाब से ही बनवाया जाये।

इस पत्र में पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि गति अवरोधकों को इंडियन रोड काँग्रेस के मानकों के हिसाब से बनाया जाये एवं स्पीड ब्रेकर दिखायी दें इसके लिये काले सफेद रंग की धारियों से इन्हें चिन्हित भी किया जाये। उन्होंने यह निर्देश भी दिये थे कि पुलिस अधीक्षकों को कहा गया था कि पुलिस की अनुमति के बिना कोई भी गति अवरोधक न बनाये जायें।