फिर बंद हो गये शहर के सारे यातायात सिग्नल!

 

 

अपने संस्थापित सिग्नल्स ही नहीं सम्हाल पा रही भाजपा शासित पालिका

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नगर पालिका चौराहे पर यातायात सिग्नल लगाने के बाद अनेक स्थानों पर लगभग तीस लाख रुपये की लागत से संस्थापित किये गये यातायात सिग्नल्स ने दम तोड़ दिया है। ये सिग्नल लंबे समय से बंद पड़े हैं और भाजपा शासित नगर पालिका प्रशासन को इसकी सुध नहीं है।

शहर में यातायात सिग्नल अब शोभा की सुपारी बनकर रह गये हैं। जिस उद्देय से जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से संचित राजस्व से इनको स्थापित किया गया है वह उद्देश्य इन सिग्नल्स के द्वारा कभी भी पूरा नहीं किया जा सका है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग से सलाह मशविरा किये बिना लगाये गये ये सिग्नल व्यर्थ ही साबित हो रहे हैं।

नगर पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भाजपा शासित नगर पालिका के द्वारा उन चीजों को संस्थापित किये जाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखायी जाती रही है जिनकी खरीदी में मोटे कमीशन की गुंजाईश ज्यादा हो, फिर भले ही ये जनता के काम आयें अथवा नहीं।

ज्ञातव्य है कि नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के अध्यक्षयीय कार्यकाल में नगर पालिका के सामने सबसे पहले यातायात सिग्नल को लगवाया गया था। इसके बाद इसी परिषद के कार्यकाल के अंतिम दिनों में बाहुबली चौराहा, छिंदवाड़ा चौक, कचहरी चौक और सर्किट हाऊस चौराहे पर सिग्नल लगवा दिये गये।

सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक तरूण नायक जब भी इस मार्ग से गुजरते थे तब इस सिग्नल पर बेतरतीब आवागमन के कारण होने वाले बाधित यातायात एवं लगने वाले जाम के चलते उनके द्वारा ही इस सिग्नल को बंद करवाने के लिये यातायात प्रभारी को निर्देशित किया गया था।

इसके पहले नगर पालिका के सामने वाला यातायात सिग्नल खराब हो गया था। सूत्रों ने बताया कि इस सिग्नल के कंट्रोल पेनल में लगे इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) की खराबी के कारण यह कई मौको पर काम नहीं करता है। जब इसकी संस्थापना करवायी गयी थी तब पालिका के तकनीकि विभाग के अधिकारियों के द्वारा इसे चैक किये बिना ही इसको पालिका की संपत्ति बना लिया गया था।

आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबी भाजपा शासित नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली से शहर के नागरिक आजिज आ चुके हैं। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से संचित राजस्व को भाजपा शासित पालिका के द्वारा इस तरह हवा में उड़ाने और इसके लिये जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही न किये जाने के कारण जनता का विश्वास अब नगर पालिका पर काबिज भाजपा से डिगता भी दिख रहा है। उल्लेखनीय होगा कि इस साल के अंत तक नगर पालिका चुनाव भी संपन्न करवाये जा सकते हैं।