निरीक्षण दर निरीक्षण, नतीज़ा सिफर!

 

 

फिर पहुँचे प्रवीण सिंह जिला अस्पताल प्रांगण!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। हालात देखकर यही प्रतीत होता है कि मई के बाद जून माह का पहला पखवाड़ा भी जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा स्वास्थ्य विभाग को समर्पित कर दिया गया है। इसके बाद भी जिले में स्वास्थ्य विभाग में सुविधाएं और व्यवस्थाएं किंचित मात्र भी पटरी पर आती नहीं दिख रही हैं।

बुधवार 12 जून को जिला कलेक्टर के द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान जिला कलेक्टर को कार्यालय में अनेक अधिकारी, कर्मचारी अनुपस्थित मिले। जिला कलेक्टर के द्वारा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिये गये।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ.एच.पी. पटेरिया, जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ.एम.एस. धर्डे, डॉ.प्रभाकर सिरसाम, डॉ.निर्मला पाण्डे, मीडिया अधिकारी एस.के. भोयर, सहायक मीडिया अधिकारी श्रीमति शांति डहरवाल, सहायक ग्रेड-02 संजय तिवारी, टी.आर. चन्द्रवंशी अनुपस्थित पाये गये।

इसी तरह सहायक ग्रेड-03 वी.एस. ठाकुर, अभय कटरे, भावना गेडाम, रजनी अशोक बरारे, हिमांशु चौकसे, प्रेम प्रताप सिंह राजपूत, रमेश कुशराम, एस.के. खरे, ऑरिंजय दयाल, ड्राईवर राजू लाल गुप्ता, शकील खान, जमाल खान, शकील अख्तर खान, मस्तराम तुमराम, राजेन्द्र कुमार कुशवाह, भृत्य मनोज कुमार साहू, एहसान मोहम्मद खान, प्रवीण कुमार, संतोष कुमार यादव, चौकीदार गोयल लाल परते, देवेन्द्र भदौरिया, एस.डोंगरे, उमेश बिसेन, एस.ई. वहीद बोहरे, डीसीएम संदीप श्रीवास, डीईओ धीरज पाल, शैलजा तिवारी, राजेन्द्र कुमार साहू, दीपक भालेकर, अतुल बघेल, अनुराग दुबे एवं कृष्ण साहू अनुपस्थित पाये गये।

इसी तरह कलेक्टर प्रवीण सिंह ने उपस्वास्थ्य केन्द्र बरघाट एवं केवलारी का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। उन्होंने तय समय में चिकित्सालय में उपस्थित रहकर मरीज़ों देखरेख व उपचार के निर्देश कर्मचारियों को दिये। उन्होंने खण्ड चिकित्सा कार्यालय केवलारी में पदस्थ लेखापाल रविन्द्र कुमार पन्द्रे की शराब पीकर कार्यालय में उपस्थित होने की शिकायतों एवं कार्य में लापरवाही बरतने कार्यालय से पृथक करने के निर्देश दिये।

जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा जिले भर में स्वास्थ्य विभाग में लगातार ही निरीक्षण किये जाने के बाद भी व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आने के कारण अब लोगों में तरह – तरह की चर्चाओं का बाजार भी गर्माने लगा है। लोगों का कहना है कि जिला कलेक्टर के एक निरीक्षण के बाद व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाना चाहिये, किन्तु एक दर्ज़न से ज्यादा बार निरीक्षण के बाद तीन दर्ज़न से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी अगर सीएमएचओ कार्यालय से ही नदारत मिलंे तो यह निश्चित तौर पर विचारणीय पहलू है, क्योंकि जिला कलेक्टर का पद जिला प्रमुख का माना जाता है।

वहीं, स्वास्थ्य विभाग में चल रहीं चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो जिला कलेक्टर के निरीक्षण और निर्देशों को स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी ही बहुत हल्के में ले रहे हैं, वरना क्या कारण है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के द्वारा अपने मातहतों को समय का पाबंद नहीं किया जा रहा है!

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