भीमगढ़ को किया जाये पर्यटन स्थल के रूप में विकसित

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं शासन प्रशासन के समक्ष अपनी ये बात रखना चाहता हूँ कि सिवनी में जिला मुख्यालय के समीप स्थित भीमगढ़ क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिये।

यह क्षेत्र पहले से ही ख्याति प्राप्त है और इसके पीछे प्रमुख वजह है यहाँ एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध का स्थित होना। इस उपलब्धि के बावजूद दुर्भाग्य से इस क्षेत्र को आज भी विकास का मुँह ताकना पड़ रहा है जबकि इस क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्हीं में से एक है पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में यहाँ तेजी से काम किया जा सकता है।

छपारा या अन्य किसी भी दिशा से लोग जब संजय सरोवर बांध देखने के लिये भीमगढ़ पहुँचते हैं तो इस ग्राम की दुर्दशा को देखकर हतप्रभ रह जाते हैं। यह विश्वास नहीं होता कि कैसे शासन प्रशासन इस महत्वपूर्ण स्थल को नज़र अंदाज कर सकता है। सिर्फ भीमगढ़ ग्राम ही नहीं बल्कि जब संजय सरोवर पहुँचा जाता है तो यहाँ भी कोई बेहतर स्थिति लोगों को दिखायी नहीं देती है।

रात में इस बांध के चारों ओर अंधकार पसर जाता है। जिस स्थल पर संजय सरोवर बांध के गेट स्थापित हैं उस स्थान पर प्रकाश की कुछ व्यवस्था अवश्य की गयी है लेकिन उसे नाकाफी ही माना जा सकता है। ऐसे में यह भी संभव है कि अंधकार का फायदा उठाकर इस महत्वपूर्ण स्थल से गैर कानूनी कार्यों को अंजाम दिया जाता हो।

यदि भीमगढ़ क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में सहेजना आरंभ किया जाता है तो इससे सरकार को होने वाली आय से कई अन्य चीजों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिये सबसे आवश्यक तो यह है कि यहाँ प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था की जाना चाहिये। इसी तरह बांध के समीप स्थित विश्राम गृह पहुँच मार्ग को भले ही संकरा रहने दिया जाये लेकिन उसे स्तरीय बनाया जाना चाहिये। वर्तमान में यह मार्ग गड्ढों से युक्त है।

इसी तरह भीमगढ़ की ओर जाने वाले मार्गों के उन रिक्त पड़े स्थलों के भी सौंदर्यीकरण की ओर ध्यान दिया जाना चाहिये जो सड़क किनारे तो स्थित नहीं हैं लेकिन सड़क से आसानी से दिखायी देते हैं। इसका कारण यह है कि एक पर्यटक जब अपनी मंजिल की ओर पहुँच रहा होता है तब वह चारों ओर अपनी नज़रें दौड़ाता हुआ गमन करके, उस संपूर्ण क्षेत्र की छवि अपने अंदर सहेजता जाता है जिसका भी काफी असर पड़ता है।

हाल ही में हुई झमाझम बारिश के बाद जब भीमगढ़ बांध के गेट खोले गये तो उस दृश्य को देखने हजारों लोग पहुँच गये जबकि बारिश में भीग भी रहे थे। चार पहिया वाहनों की कतारें जिस तरह से लगी हुईं थीं उसे देखकर लगा कि शासन-प्रशासन यदि इस क्षेत्र की ओर गंभीरता से ध्यान दे तो इस संपूर्ण क्षेत्र का कायाकल्प तेजी के साथ हो सकता है।

मो.दानिश शेख

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