. . . तो बच जाती दोनों की जान!

 

 

न प्रकाश व्यवस्था, न ही बैरियर, न कोई कर्मचारी!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात में मुंगवानी के पास हुए हादसे में जय सनोडिया और चंद्र शेखर सनोडिया के निधन के बाद अब शहर में चर्चाओं का बाजार गर्माता दिख रहा है। लोग यह कहते दिख रहे हैं कि जिलाधिकारी के द्वारा 31 जुलाई को दिये गये निर्देशों का अगर पालन हो रहा होता तो दोनों को अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।

ज्ञातव्य है कि जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा 31 जुलाई को केवलारी क्षेत्र के भ्रमण के दौरान यह निर्देश जारी किये गये थे कि बारिश के मौसम में पुल, पुलियों, रपटों पर पानी होने की दशा में इसे पार करने नहीं दिया जाये। इसके लिये दोनों ओर कर्मचारियों की तैनाती और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के निर्देश उनके द्वारा दिये गये थे। विडंबना ही कही जायेगी कि इसके बाद से लगातार ही उफनते नदी, नालों, पुल, पुलियों पर से पानी बहने के बाद भी शालेय विद्यार्थियों सहित ग्रामीणों के द्वारा पार करने के चित्र और वीडियो वायरल होने के बाद भी किसी के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गयी है।

सोमवार 09 सितंबर को सुबह जब जय सनोडिया और चंद्र शेखर सनोडिया के शव का पोस्ट मार्टम किया जा रहा था, उस समय पीएम सेंटर में भारी तादाद में युवा उपस्थित थे। कमोबेश हर किसी के द्वारा इस बात की चर्चा की जा रही थी कि अगर जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा 31 जुलाई को दिये गये आदेश का पालन सुनिश्चित करवा दिया जाता और पुसेरा के पास वाले नाले पर भी प्रकाश की व्यवस्था होती एवं कोई कर्मचारी मौजूद होता तो उनके वाहन को पानी में जाने से मना कर दिया जाता और यह दुर्घटना कारित ही नहीं होती।

लोगों का कहना था कि अमूमन हर बार ही इस तरह के निर्देश जारी किये जाते हैं, किन्तु इन निर्देशों का पालन हो भी रहा है अथवा ये महज कागजी निर्देश ही रह जाते हैं, इस बारे में अगर उच्चाधिकारी विचार करते तो इस तरह की घटना को होने से रोका जा सकता था।

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