अचानक बंद हो जाते हैं चिटफण्ड कंपनियों के कार्यालय!

 

 

प्रशासन की नाक के नीचे लुट रहे निवेशक!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। लगभग आधे दशक से जिले में चिटफण्ड कंपनियों के द्वारा निवेशकों के साथ सरेआम धोखाधड़ी की जा रही है और प्रशासन इस मामले में मूक दर्शक ही बना बैठा है। साई प्रसाद कंपनी के अलावा प्रशासन का नज़ला अभी तक किसी पर नहीं टूटा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में चिटफण्ड कंपनियों का जाल एक बार फिर फैलना आरंभ हुआ है। जिला मुख्यालय में जगह – जगह बिना बोर्ड लगाये ही चिटफण्ड कंपनियों के द्वारा अपने कारोबार को अंजाम दिया जा रहा है। जिला मुख्यालय में ही एक दर्जन से ज्यादा चिटफण्ड कंपनियों के द्वारा निवेशकों को आकर्षित कर उनसे राशि जमा करवायी जा रही है।

बताया जाता है कि आधे दशक में चिटफण्ड कंपनियों के कार्यालय का स्थान तो नहीं बदला है पर अनेक कंपनियों के नाम और मुख्यालय के कथित पते अवश्य बदल दिये गये हैं। कंपनियों के नाम बदल जाने के कारण अब निवेशक अपने पैसे लेने के लिये दर-दर भटकने पर मजबूर हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडर वेयर प्राईवेट लिमिटेड का कार्यालय जिंदल अस्पताल के पीछे हुआ करता था। यह कार्यालय लगभग बंद है। इसी तरह शहर के पॉश इलाके बारापत्थर में संचालित होने वाला एक चिटफण्ड कंपनी का कार्यालय भी बंद हो गया है। इसके स्थान पर अन्य कंपनी ने अपना कारोबार आरंभ कर दिया है।

ग्रामीण अंचल से आये एक निवेशक ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उसके द्वारा चिटफण्ड कंपनी के लुभावने ऑफर पर भरोसा कर, निवेश किया गया था। समयावधि जब पूरी हुई और वह अपना पैसा वापस पाने पहुँचा तो कंपनी के कार्यालय का स्थान तो वही था पर कर्मचारी बदल गये थे। कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि पहले वाली कंपनी का कार्यालय बंद हो चुका है वे (निवेशक) चाहें तो उनकी (नयी कंपनी) में निवेश कर सकते हैं।

उक्त निवेशक से जब यह कहा गया कि इस मामले में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवा दी जाये ताकि उनका पैसा वापस मिल सके, के जवाब में उक्त निवेशक ने कहा कि पुलिस सौ तरह के सवाल करेगी और कंपनियों के कारिंदे पुलिस को सेट करने की दुहाई दिया करते हों, तो अब इस मामले मेें क्या उम्मीद की जाये।

बताया जाता है कि इस तरह के सैकड़ों निवेशक अपने आपको लुटा पिटा महसूस कर रहे हैं। आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि चिटफण्ड कंपनियां जिले में जगह – जगह अपना कार्यालय खोलकर बैठी हैं और इन पर न तो आयकर विभाग की नज़र है और न ही पुलिस की, जिसके चलते इनका करोबार फल फूल रहा है।

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