टोल विवाद : हंगामा है क्यूं बरपा!

 

 

(लिमटी खरे)

हाल ही में फुलारा टोल प्लाज़ा पर खनिज विभाग की एक महिला अधिकारी के वाहन को रोकने के मामले में हंगामा मचा रहा। इस मामले में टोल प्लाज़ा पर अभद्रता करने वाले सात कारिंदों को पुलिस ने अपना मेहमान बनाया है। इस पूरे मामले में जिस तरह की खबरें और वीडियो प्रकाश में आये हैं, उस हिसाब से तो यह पूरा मामला ही जबरन में हुआ प्रतीत हो रहा है।

कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट भी जमकर वायरल हो रही हैं कि सरकारों के द्वारा वाहन खरीदने के उपरांत परिवहन विभाग में उसके पंजीयन के दौरान रोड टैक्स के नाम पर भारी भरकम रकम वसूल की जाती है। इसके बाद टोल टैक्स किस बात का!

वैसे इस टोल प्लाज़ा में कर्मचारियों के द्वारा वाहन चालकों के साथ अभद्रता किये जाने की शिकायत पहली बार नहीं मिली है। इसके पहले भी दर्ज़नों बार वाहन चालकों के द्वारा अभद्रता की शिकायत किये जाने के बाद भी लखनवाड़ा पुलिस के द्वारा किसी तरह की कठोर कार्यवाही नहीं किये जाने से टोल कर्मचारियों को शह मिलती रही है और उनके हौसले बुलंदी पर रहते आये हैं।

इधर, इस मामले में समाचार माध्यमों से खनिज अधिकारी आशालता वैद्य (जिनके साथ कथित तौर पर यह वाकया हुआ था) का पक्ष़्ा भी सामने आया है। इसके अनुसार उनके द्वारा कहा गया है कि कई बार अधिकारियों या कर्मचारियों को सरकारी वाहन की बजाय निजि वाहन का उपयोग करना पड़ता है ताकि संबंधित अपराधियों को इसकी भनक न लगे!

अगर यह बात खनिज अधिकारी के द्वारा कही गयी है तो यह बात सोलह आने सत्य मानी जा सकती है कि जब अपराधियों की धर पकड़ के लिये सरकारी महकमे के अधिकारी कार्यवाही के लिये जाते हैं तो अनेकों बार उनके द्वारा सरकारी वाहनों की बजाय निजि वाहनों का उपयोग किया जाता है।

उदाहरण के लिये अगर पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने के लिये जाती है तो कई बार पुलिसकर्मी गणवेश के बिना, सरकारी वाहन के बिना ही कार्यवाही को अंजाम देने जाते हैं। इसी तरह आबकारी विभाग का अमला जब अवैध शराब पकड़ने जाता है तो वह भी कमोबेश इसी तरह से जाता है। इस दौरान अधिकारी या कर्मचारी अकेले संभवतः नहीं ही जाते होंगे, उनके साथ अमले के अन्य साथी भी मौजूद रहते ही होंगे!

विभागों के अधिकारी जब निजि वाहनों से किसी अभियान पर जाते हैं तो रास्ते में पड़ने वाले टोल प्लाज़ा पर उनके निजि वाहनों को बिना पथकर दिये जाने देने के नियम शायद नहीं ही होंगे तभी तो टोल प्लाज़ा के कर्मचारियों के द्वारा उन्हें रोका गया होगा। यहाँ यह बात भी उल्लेखनीय होगी कि जब भी कोई सरकारी नुमाईंदा अपने मुख्यालय से कहीं भी जाता है तो उसे दैनिक भत्ता और यात्रा भत्ता (टीएडीए) मिलता ही होगा।

बहरहाल, अगर खनिज अधिकारी किसी विशेष मुहिम पर जा रहीं थीं और वे अपना परिचय या पहचान (आईडेंटिटी) उजागर न होने देने के लिये निजि वाहन का उपयोग कर रहीं थीं, तो इस तरह के विवाद और जो वीडियो वायरल हुआ उसके बाद तो सभी को पता चल गया होगा कि एक खनिज अधिकारी निजि वाहन में बैठकर सिवनी से छिंदवाड़ा की ओर कूच कर रहीं हैं!

वर्तमान में सोशल मीडिया का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कोई भी खबर अब किसी से छुपी नहीं है। सेकण्ड्स में ही सोशल मीडिया के जरिये बात फैल जाती है। यह अलहदा बात है कि अति उत्साह में अनेक लोग खबरों की सत्यता को परखे बिना ही इसे आगे प्रेषित (फॉरवर्ड) कर देते हैं। सोशल मीडिया के लाभ भी हैं तो इसके जरिये अफवाह फैलने का खतरा ज्यादा होता है।

वैसे यह घटना ब्रहस्पतिवार की बतायी जा रही है। अगर खनिज अधिकारी किसी विशेष विभागीय मुहिम पर जा रहीं थीं और उन्हें टोल प्लाज़ा के कर्मचारियों के द्वारा जबरन रोका गया तो यह निंदनीय कार्य है और इसे शासकीय काम में बाधा डालने जैसा माना जा सकता है। इसके लिये टोल कर्मचारियों को दण्डित किया जाना निहायत ही जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके, पर शनिवार तक किसी भी संचार माध्यम के जरिये यह बात सामने नहीं आयी है कि खनिज अधिकारी के द्वारा जिस जरूरी विभागीय काम से जाया जा रहा था उसमें उन्हें सफलता मिली अथवा नहीं! वैसे जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है उस वीडियो में खनिज अधिकारी के वाहन में चालक के अलावा और अन्य कर्मचारी दिख नहीं रहे हैं! यह बात भी शोध का ही विषय मानी जा सकती है कि बिना अधीनस्थ अमले के वे किस विशेष विभागीय मुहिम पर जा रहीं थीं!

इस मामले में लखनवाड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है, अर्थात अपराध कारित हुआ है और अपराध कारित होने के बाद वह बात छुपाया जाना संभव नहीं होता है। उच्चाधिकारियों को चाहिये कि इस मामले में खनिज अधिकारी से भी पूछताछ की जाये कि वे किस जरूरी विभागीय काम या मिशन से जा रहीं थीं कि उन्होंने टोल प्लाज़ा में रसीद कटाये जाने की बात पर दनादन फोन घुमाये और इस मामले का वीडियो भी किसी ने बनाया और उसे सोशल मीडिया पर भेजा!

यह पूरा घटनाक्रम जिस टोल प्लाज़ा पर घटित हुआ वह सिवनी और छिंदवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित है। इस लिहाज से यह माना जा सकता है कि संभवतः वे किसी संयुक्त दल का हिस्सा बनकर जिले अथवा पड़ौसी जिले में किसी कार्यवाही को अंजाम देने जा रहीं थीं। इस मामले में पड़ौसी जिले के खनिज अमले से भी पूछताछ की जाना चाहिये।

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