आदिवासी समुदाय अंध विश्वासों से रहें दूर

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कॉमरेड डी.डी. वासनिक और मीडिया प्रभारी कॉमरेड यीशु प्रकाश ने आदिवासी समुदाय को अंध विश्वासों से दूर रहने की सलाह दी है।

उनके द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्तमान समय में बरसात का समय है ऐसे में लोग बीमार पड़ते हैं, शरीर में खुजली उठती है, दूषित पानी पीने से बीमार होते हैं, हरी भाजी और हरी सब्जियों के दूषित होने के कारण उल्टी दस्त होते हैं। ये सब वर्षा जनित रोग हैं जिनका उपचार अस्पताल में आकर डॉक्टरों से कराना चाहिये। इसी तरह वर्षा ऋतु में सांप और जहरीले कीड़े निकलते हैं और मौका पाकर मनुष्य को काट भी देते हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार ऐसे समय में अक्सर ऐसा देखने में आता है कि सामान्य जन और आदिवासी समुदाय शरीर की बीमारियों और सर्प काटने का उपचार पण्डा, नीम हकीम, ओझा, गुनिया और भुमका आदि लोगों से करवाने में अपना समय नष्ट करते हैं और जब पीड़ित व्यक्ति अंतिम अवस्था में पहुँच जाता है तब लोग पीड़ित को अस्पताल लेकर आते हैं और ऐसे में 90 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है, यह एक विचारणीय और चिंतनीय प्रश्न है।

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के जिलाध्यक्ष पूनाराम कुमरे, डी.डी. वासनिक, पी.आर. इनवाती, एस.आर. धुर्वे, संदीप मरावी, प्रदीप मरावी, झलकन भलावी, वसंतराव भलावी, अशोक मर्सकोले, डॉ.बी.सी. उके आदि ने सभी सामान्य जनता और आदिवासी समुदाय से अपील की है कि बीमार होने एवं सांप के काटने पर पीड़ितों को तत्काल अस्पताल लाकर उपचार करवाया जाये और किसी भी हालात में पण्डा, नीम हकीम, ओझा, गुनिया और भुमका आदि के चक्कर में न पड़कर अंध विश्वास से बचें।