यात्री प्रतीक्षालय बन गये नशेड़ियों के मनपसंद स्थल

यात्री प्रतीक्षालय जैसे सार्वजनिक स्थान इन दिनों सिवनी में नशाखोरों के लिये उनके मनपसंद अड्डे बन गये हैं। इनमें भी शहर के व्यस्ततम इलाके में मौजूद गाँधी भवन के समीप स्थित यात्री प्रतीक्षालय प्रमुख है जिसका उपयोग नशाखोरों के द्वारा जमकर किया जा रहा है।

दरअसल सिवनी में आबकारी विभाग इन दिनों पूर्णतः निष्क्रिय हो चुका है और जितना कुछ भी यह विभाग सक्रिय है तो यह माना जा सकता है कि उसके द्वारा अपनी समस्त ऊर्जा को, शराब व्यापारियों के सिंडीकेट की सेवाओं में ही जाया किया जा रहा लगता है। इसका परिणाम ये है कि शहर ही नहीं बल्कि जिले के चप्पे-चप्पे में नशे की सामग्री, लोगों को सहज ही उपलब्ध हो रही है।

सिवनी में गाँधी भवन के समीप बनाये गये यात्री प्रतीक्षालय में विभिन्न स्थानों से युवा आकर जुटते हैं। यहाँ आकर वे दिन में ही गांजे आदि का सेवन करते हैं। उनके इस तरह के कृत्य से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुलिस भी इस ओर ध्यान नहीं देती है जबकि बताया जाता है कि आला अधिकारियों की जानकारी में उक्त बात है।

गौर करने वाली बात यह है कि यात्री प्रतीक्षालय बनाते समय यात्रियों को सुविधाएं देने की ओर ध्यान देकर इन प्रतीक्षालयों का निर्माण तो कतई नहीं कराया गया है। सिवनी शहर से अच्छे तो गाँव-देहात में बने हुए कई यात्री प्रतीक्षालयों को माना जा सकता है। शहर के यात्री प्रतीक्षालयों में कम से कम लाईट की व्यवस्था तो की ही जाना चाहिये थी ताकि रात के समय में महिलाएं भी इनका उपयोग सहजता के साथ कर सकतीं।

यदि यात्री प्रतीक्षालयों में प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी है तो कम से कम इतना तो किया ही जा सकता था कि इनके सामने या इनके बाजू में ही एक-एक स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था बना दी जाती लेकिन ऐसा भी करने की जहमत अब तक किसी के द्वारा नहीं उठायी गयी है। इससे तो यही साबित होता दिखता है कि नगर पालिका का नेत्तृत्व एक महिला नेत्री के हाथों में होने के बावजूद महिलाओं को उसका कोई विशेष फायदा नहीं मिल रहा है।

स्वच्छता की दुहाई देने वाले भी इस ओर ध्यान देते नहीं दिखते हैं कि यात्री प्रतीक्षालयों में या उसके आसपास सार्वजनिक शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रतीक्षारत यात्रीगण निश्चित रूप से ऐसे सार्वजनिक स्थल पर लघुशंका या दीर्घशंका से निवृत्त होने के लिये विवश हो रहे हैं जहाँ यह क्रिया न किये जाने का प्रचार किया जा रहा है।

इस तरह से यात्री प्रतीक्षालयों में शौचालयों को महत्व न दिया जाना यह भी साबित करने के लिये पर्याप्त है कि सिवनी नगर पालिका स्वच्छता को लेकर कतई गंभीर नहीं है। बहरहाल ऐसे स्थानों पर सार्वजनिक शौचालयों की सिवनी में महती आवश्यकता है जिसके लिये अब जिला प्रशासन से ही कोई उम्मीद रह जाती है।

विवेक गौर


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