मीन लगन में आरंभ होगा हिंदू नव संवत्सर 2076 परिधावी

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। हिंदू नव संवत्सर 2076 परिधावी (हिंदू नववर्ष) छः अप्रैल को मीन लग्न में आरंभ होगा।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक संवत्सर कई ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहेगा। इस वर्ष में राजनीतिक, आर्थिक व न्यायायिक क्षेत्र में कई फैसले होंगे, जिसका असर जनता पर पड़ेगा। वहीं प्राकृतिक आपदा, भूकंप, आतंकवादी हमले की घटनाएं बढ़ेंगी। साथ ही राजनीतिक उथल – पुथल, दल – बदल, भीतरघात व विरोधी ताकतवर बनकर उभरेंगे।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार हिंदू नये वर्ष संवत्सर के राजा शनि और सूर्य मंत्री होंगे। देवगुरू बृहस्पति को कोई पद नहीं मिला है। संवत में शनि धनु राशि में रहेंगे। धनु राशि का स्वामी गुरू है, जो धर्म, कर्म की राशि है। इसलिये इस क्षेत्र में न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक फैसला सुनाया जा सकता है।

ज्योषिताचार्यों ने बताया कि आद्रा नक्षत्र में वर्षा का प्रवेश प्रदेश में 22 जून को होगा। बारिश की स्थिति से फसलों को लाभ के साथ तेज बारिश से नुकसान भी होगा। इस बार बासंती नवरात्रि (06 अप्रैल से 13 अप्रैल) आठ दिन की होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्रि में माता महाकाली, लक्ष्मी व सरस्वती की आराधना की जाती है।

उन्हें प्रसन्न करने से सुख, समृद्धि, धन धान्य की प्राप्ति होगी। मंदिरों में प्रतिदिन माता को जल अर्पित किया जायेगा। इस दौरान भक्त दुर्गा सप्तमी का भी पाठ करेंगे। अखण्ड ज्योति पूरे नवरात्रि पर्व के दौरान जलेगी। इस दौरान दान, पुण्य व शुभकर्म करने से सुख शांति की प्राप्ति होगी।

नवरात्रि में कलश, घट स्थापना : ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक नवरात्रि में कलश, घट स्थापना एवं अखण्ड ज्योति के लिये सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त चौघड़िया अनुसार सुबह साढ़े 07 बजे से 09 बजे तक शुभ, दोपहर 12 बजे से डेढ़ बजे तक चर, दिन में डेढ़ बजे से 03 बजे तक लाभ, दिन में 03 बजे से साढ़े 04 बजे तक अमृत, शाम को गौधूलि बेला में 06 बजे से साढ़े 07 बजे में लाभ होगा। स्थिर लग्न अनुसार वृषभ 07.55 से 09.53 तक सुबह, सिंह लग्न 02.22 से 04.34 दिन तक, वृश्चिक लग्न 09 से 11.16 रात्रि तक शुभ मुहूर्त रहेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ माता रानी की पूजा : 06 अप्रैल को प्रथम शैलपुत्री, 07 अप्रैल को द्वितीय ब्रह्मचारिणी की पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग में, 08 अप्रैल तृतीया पर चंद्रघण्टा के साथ गणगौर व्रत रवियोग के साथ, 09 अप्रैल चतुर्थ कूष्माण्डा सर्वार्थ सिद्धि योग में10 अप्रैल पंचम स्कंध माता सर्वार्थ सिद्धि योग में, 11 अप्रैल षष्ठम कात्यायिनी का रवि योग में, 12 अप्रैल सप्तमी काल रात्रि सर्वार्थ सिद्धि योग में, 13 अप्रैल दुर्गाष्टमी महागौरी एवं नवमी सिद्धिदात्री नक्षत्रों का राजा पुष्य नक्षत्रों में राम प्रगटोत्सव मनाया जायेगा। 14 अप्रैल को ज्वारे विसर्जन एवं खरमास समाप्त होगा।