गति नहीं पकड़ पा रहा चुनाव प्रचार!

 

 

शहर में भाजपा काँग्रेस का जनसंपर्क जारी, मतदाता है मौन!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। मण्डला और बालाघाट संसदीय क्षेत्र के लिये मतदान का महापर्व 29 अप्रैल को संपन्न होगा। प्रशासनिक स्तर पर इसके लिये तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं, पर जिले में सियासी दलों के नुमाईंदों के द्वारा जिस तरह से चुनाव प्रचार किया जा रहा है उसे देखकर मतदाताओं में भी उत्साह कम ही दिख रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर लोकसभा चुनावों के लिये तैयारियों को लेकर अनेक बैठकें की जा चुकी हैं। स्वीप प्लान के जरिये जिला मुख्यालय में तो मतदाताओं को मतदान के लिये प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है किन्तु ग्रामीण अंचलों में स्वीप गतिविधियां कमजोर ही प्रतीत हो रही हैं।

कहने को तो सिवनी जिले के पास परिसीमन के उपरांत दो-दो सांसद रहते आये हैं किन्तु केंद्रीय योजनाओं के मामले में सिवनी का कलश रीता ही रहने से मतदाता भी अभी तक मौन ही दिख रहा है। परिसीमन के उपरांत मण्डला संसदीय क्षेत्र में जिले की केवलारी और लखनादौन विधान सभा सीट आयी, यहाँ से जिले का प्रतिनिधित्व काँग्रेस के बसोरी सिंह मसराम और भाजपा के फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा किया गया था।

इनमें से फग्गन ंिसह कुलस्ते केंद्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भी रहे, किन्तु उनके मंत्री रहने का लाभ जिले को नहीं मिल पाया। जिले में केंद्रीय इमदाद वाली स्वास्थ्य सेवाओं की सौगात न मिल पाने के कारण लोगों में निराशा ही दिख रही है।

इधर परिसीमन के उपरांत बालाघाट संसदीय क्षेत्र का अंग बनी जिले की सिवनी और बरघाट विधान सभा सीटें। परिसीमन के उपरांत बालाघाट संसदीय क्षेत्र भाजपा के हाथों में ही रहा। बालाघाट से के.डी. देशमुख और बोध सिंह भगत ने लोकसभा में जिले का प्रतिनिधित्व किया।

बोध सिंह भगत के द्वारा सांसद आदर्श ग्राम के रूप में गोपालगंज का चयन किया गया था। उनके द्वारा इस सांसद आदर्श ग्राम की बदहाली दूर नहीं की जा सकी। इसके अलावा जिले में नैरोगेज़ से ब्रॉडगेज़ के अमान परिवर्तन के कार्य को भी उनके द्वारा वांछित गति प्रदान नहीं करवायी जा सकी।

मतदान की तिथि जैसे – जैसे समीप आती जा रही है वैसे – वैसे भगवान भास्कर के तेवर भी तल्ख होते जा रहे हैं। गर्मी के मौसम में सूरज चढ़ने से लेकर रात ढलने तक सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम ही दिखती है। इन परिस्थितियों में सियासी दलों के कार्यकर्त्ताओं और नेताओं के द्वारा पसीना बहाकर चुनाव प्रचार किया जा रहा है।

संभवतः यह पहला ही मौका होगा जब लोकसभा चुनावों में जिला मुख्यालय में लोकसभा चुनावों में मतदान के चार दिन पहले तक किसी भी राष्ट्रीय या प्रदेश स्तर के नेता के द्वारा सभा नहीं की गयी हो। इस बार जिला मुख्यालय को मानो बड़े नेताओं के द्वारा बिसार ही दिया गया है।

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