वनभूमि के कब्जेधारियों को बेदखल करने पर रोक

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। राज्य शासन ने अपात्र कब्जेधारियों को वनभूमि से बेदखल करने की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। आदिमजाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं।

प्रमुख सचिव ने कहा है कि वन अधिकार कानून के तहत निरस्त या अमान्य किए गए दावेदारों को फिलहाल बेदखल न करें। दावों का फिर से परीक्षण करने की प्रक्रिया तय की जा रही है। दावों का एक बार और परीक्षण किए जाने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रदेश में तीन लाख 56 हजार 296 दावे विभिन्न् आधार पर निरस्त या अमान्य किए गए हैं। इन दावों का परीक्षण कलेक्टर की देखरेख में अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदारों ने किया था। प्रदेश की इस रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को अपात्र पाए गए सभी आवेदकों को वनभूमि से बेदखल करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने संबंधितों को बेदखल कराने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपी थी और उनसे हलफनामा भी मांगा था।

इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार अपील में गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने ही 28 फरवरी को पुराने फैसले पर रोक लगा दी। अब आवेदन निरस्ती के आधार, आवेदनों के निराकरण के लिए अपनाई गई प्रक्रिया सहित सात बिंदुओं पर मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है। विभाग ने कलेक्टरों को इसकी जानकारी देते हुए बेदखली की कार्रवाई रोकने को कहा है।

दावों पर फिर से होगी सुनवाई : सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर 27 फरवरी को राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई थी। समिति ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुत करने से पहले सभी निरस्त या अमान्य दावे आवेदनों पर फिर से विचार करने का फैसला लिया है।

दावे निरस्त करने पर कांग्रेस ने उठाई थी आपत्ति : प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने ये दावे निरस्त किए थे। तब विपक्ष में बैठ रही कांग्रेस ने आपत्ति उठाई थी। कांग्रेस का आरोप था कि पट्टे देने में राजनीतिक पक्षपात किया जा रहा है। कांग्रेस ने इन आवेदनों का फिर से परीक्षण कराने की मांग भी की थी। सरकार में आने के बाद कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोर्ट गई और राहत मिली।

इन कारणों से निरस्त किए गए थे आवेदन : जिस भूमि के लिए आवेदन किया वह वनभूमि नहीं थी। वनभूमि पर काबिज होने के साक्ष्य नहीं मिल पाए। पट्टे के लिए दावा तो कर दिया, पर भूमि पर काबिज नहीं पाए गए। परिवार के सदस्यों ने दोहरे आवेदन प्रस्तुत कर दिए। जीविका के लिए वनभूमि पर आश्रित नहीं हैं। फिर भी आवेदन कर दिया।