जानिए कैसी मूवी है कबीर सिंह

 

 

 

 

 

कास्ट: शाहिद कपूर, कियारा आडवाणी

डायरेक्टर: संदीप रेड्डी वांगा

शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) , कियारा आवाणी (Kiara Advani) की फिल्म कबीर सिंह‘ (Kabir Singh) सिनेमा घरों में रिलीज हो गई है।  फिल्म रिव्यू से पहले आपको बता दें कि  संदीप रेड्डी वांगा द्वारा निर्देशित कबीर सिंह‘, विजय देवरकोंडा और शालिनी पांडे अभिनीत की तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डीकी हिंदी रीमेक है।  फिल्म कबीर सिंह अपने ट्रेलर और गानों को लेकर चर्चा में बनी है।  वहीं  शाहिद को किरादार को रोल को लेकर फैंस काफी बेताब थे। अब फैंस की बेताबी खत्म हो गई  है और यह फिल्म आज रिलीज हो गई है। अगर आप शाहिद के फैन है और इस फिल्म को देखने की चाहत रखते हैं तो  टिकट बुक करने से पहले  आप इस फिल्म का रिव्यू पढ़ ले…।

जैसा की आपको को पहले ही फिल्म के ट्रेलर और गानों में आपको शाहिद के किरदार को लेकर ये अनदेशा हो गया था कि कबीर  सिंह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसे अपने गुस्से पर काबू नहीं होता है।  लेकिन  आपको बता दें कि ऐसा नहीं है फिल्म में शाहिद का किरदार काफी अलग है, फिल्म की शुरूआत में आप भले उनके रोल को समझने में कंफ्यूज हो जाएंगे , लेकिन फिल्म के अंत तक उनके किरदार के साथ रिलेट कर सकेंगे। फिल्म को गहराई से स्टाइल किया गया है, इसमें बहुत सारे दिलचस्प सीन हैं और एक्शन सीक्वेंस एक ही समय में मानवीय और क्रूर हैं। यह बड़ी स्क्रीन पर बहुत सारे स्लो-मोशन वीडियो के साथ नजर आती है और प्यार में पड़ने वाले पागल इंसान की कहानी को दर्शाती है।

कहानी

कबीर सिंह (शाहिद कपूर) दिल्ली के एक मेडिकल स्टूडेंट हैं, जो काफी मूडी है। उसे हर छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आ जाता है।  कबीर सिंह मेडिकल के टॉपर भी  भी है लेकिन  एक दिन उसे जूनियर फर्स्ट ईयर  स्टूडेंट प्रीति (कियारा आडवाणी) से कबीर को पहली नजर में प्यार हो जाता है। दोनों में इश्क होता है।  कॉलेज में उसे अपनी जूनियर प्रीति (कियारा आडवाणी) से प्यार हो जाता है। प्रीति का परिवार कबीर और उसके रिश्ते के खिलाफ होता है और प्रीति की शादी किसी और व्यक्ति के साथ करा दी जाती है। कबीर को  को प्रीति की शादी का गहरा सदमा लगता है और उसे नशे की लत में डूब जाता है।  नशे की लत के कारण उसके पिता (सुरेश ओबेरॉय) उसे घर से बाहर कर देते हैं। फिर शुरू होती है कबीर के संघर्ष की दास्तां। कबीर सिंह -प्रीति की लव स्टोरी अपने परवान चढ़ने से पहले ही खत्म होने के कगार पर आ जाती है।  नशे की लत  में डूबे कबीर की जिंदगी में  कई उतार-चढ़ाव आए लेकिन अंत में इस मेडिकल कॉलोज की लव स्टोरी में एक ट्वीस्ट है , जिसे जानने के लिए आपको सिनेमा घरों में जाना पड़ेगा।

निर्देशन -संगीत-संवाद

डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने कबीर सिंह  को उसके  असली रुप में लाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है।  फिल्म के पहले हाफ में काफी उतार-चढ़ाव है। बहुत सी जगहों पर एडिटिंग में खामियां नजर आती है। दूसरे हाफ की बात करें तो फिल्म काफी इमोशनल हो जाती है। कुछ सीन्स में आपकी आंखें भी नम हो सकती है। संदीप रेड्डी वांगा  ने इमोशन लाने के लिए काफी सराहनीय काम किया है, साउंड डिजाइन से लेकर ह्यूमर तक, सब कुछ बहुत ही अच्छा है। केरेक्टर्स को समझाने के लिए जो बार बार सीन्स दिखाई दिए हैं । अब फिल्म के गानों की बात करें तो आपको बता दें कि फिल्म के गाने  फिल्म से एक दम रिलेट करते हुए दिखाई दिए। चाहे कबीर -प्रीति की पहली मुलाकात हो या  इस कपल के बिछड़ने के बाद कबीर का नशे में डूब जाना हो। फिल्म में गानों का चयन काफी शानदार है। संवाद मनोरंजक होने के साथ ही साथ काफी भावुक कर देने वाले हैं।

एक्टिंग और खास बातें

फिल्म के पहले भाग की शुरूआत से लेकर अंत तक शाहिद कपूर ही पर्दे पर छाए रहते हैं, उनकी फिल्म में आइकॉनिक एंट्री  आपका दिल जीत लेगी। फिल्म में शाहिद ने कबीर सिंह को पर्दे पर शानदार तरीके से जिया है, जिसके लिए उनकी तारीफ करना  लाजमी है।  एक गुस्सैलमस्तमौला आशिक  या  नशेड़ी-सनकी  यासमाज की ऊंच-नीच से ऊपर उठ चुके इंसान के रूप में शाहिद कपूर की एक्टिंग दिल जीतने में कामयाब है।  अब कियारा आडवाणी की एक्टिंग की बात करें तो भले ही कियारा का रोल कम है, और उनका अभिनय साधारण है लेकिन वह अपने स्टाइल और उनकी मासूमियत  देखकर आप अपना दिल हार बैठेगें।

अब फिल्म की खास बातों पर ध्यान दे आपको बता दें कि कबीर सिंह फिल्म देखने  के बाद आपको अपने कॉलेज की लव स्टोरी जरूर याद आएगी। फिल्म में प्यार में नशेड़ी हुए शाहिद का हर अंदाज आपको पसंद आएगा।  कबीर सिंहकुछ भी बढ़ा चढ़ा कर नहीं दर्शाया गया है, क्यूंकि, शाहिद इस कैरेक्टर को बहुत ही उम्दा तरीके से पेश कर रहे हैं। ये कैरेक्टर अपनी क्रोध की आग में जाता रहता है और पाने लोगों को भी उसमें जलाता रहता है।  शाहिद कपूर का किरदार और उनकी अदाकारी आपको  फिल्म देखने के लिए विवश कर देगी।  संवाद मनोरंजक  होने के साथ ही साथ  फिल्म आखिर तक बांधे रखती है।

(साई फीचर्स)

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