ये रहे राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। रक्षा बंधन ऐसा पर्व है, जिसका इंतजार हर भाई-बहन को बेसब्री से होता है। इस बार ये पर्व खास योग लेकर आ रहा है। रक्षा बंधन का त्यौहार भाई – बहन का पर्व है। बहन, भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वह ताउम्र उसकी रक्षा करेगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार हिंदू धर्म में रक्षा बंधन के त्यौहार का बहुत ही अधिक महत्व है। इस पर्व को भाई – बहन का त्यौहार माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों के कलाई में रक्षा सूत्र बांधती है। इसके साथ ही उनकी लंबी उम्र की कामना करतीं हैं।खास बात ये भी है कि ये पर्व सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि सिख और जैन भी जोरदार तरीके से मनाते हैं। इस बार राखी का यह पावन त्यौहार गुरुवार 15 अगस्त को मनाया जायेगा।

रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार राखी बांधने का मुहूर्त बहुत ही लंबा है। इस बार रक्षा बंधन में बहनंे अपने भाई को सुबह 05 बजकर 49 मिनिट से शाम 06 बजकर 01 मिनिट तक राखी बांध सकतीं हैं।

ऐसे समझें रक्षा बंधन पंचांग: रक्षा बंधन अनुष्ठान का समय सुबह 0553 से शाम 0558, अपरान्ह मुहूर्त दोपहर 0143 से शाम 0420, पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी दोहपर 0345 (14 अगस्त) एवं पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी शाम 0558 (15 अगस्त) इसके अलावा भद्रा समाप्त होगी सूर्याेदय से पहले।

रक्षा बंधन की पूजा विधि : रक्षा बंधन के दिन अपने भाई को इस तरह राखी बांधें। सबसे पहले राखी की थाली सजायें। इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। फिर भाई को मिठाई खिलायें। अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्पर्श कर उसका आशीर्वाद लें।

अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्पर्श करना चाहिये। राखी बांधने के बाद भाईयों को इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार बहनों को भेंट देना चाहिये। ब्राह्मण या पंडितजी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं।

राखी बंधवाते समय भाई अपना मुँह पश्चिम दिशा में करके बैठें। दरअसल सुबह साढ़े 05 बजे चन्द्रमा कुंभ राशि में 03 डिग्री का होगा और ये सारे दिन उत्तर की तरफ बढ़ेगा।

इस स्थिति में अगर आप पश्चिम की ओर बैठेंगे तो सुबह – सुबह चन्द्रमा आपके सामने होगा और बाकी दिन ये दाहिनी ओर जाता जायेगा। सामने का और दाहिनी ओर का चन्द्रमा शुभ होता है। अतः राखी बंधवाते समय भाई अगर पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके बैठे तो अच्छा होगा।