खतरे के साये में शाला जाने पर मजबूर विद्यार्थी!

 

रेल पटरी से होकर गुजर रहीं छात्राएं!

(ब्यूरो कार्यालय)

घ्ंासोर (साई)। जिले के घंसौर में पिछले साल बड़ी रेल आरंभ हो गयी है लेकिन ठेकेदार ने जिस तरह का काम किया है वह शुरुआत से ही लोगों के लिये परेशानी का सबब बना हुआ है।

यहाँ पर रेलवे द्वारा सही तरीके से काम न करने और एक सड़क न बनाने से छात्र – छात्राओं को जान हथेली पर रखकर स्कूल जाना पड़ रहा है। इसके कारण कभी भी हादसे की आशंका बनी हुई है। विभागीय अधिकारी, जन प्रतिनिधि व ग्राम पंचायत इस पर गंभीर दिखायी नहीं दे रहे हैं।

चार सौ मीटर की जगह एक किलो मीटर का सफर : तहसील मुख्यालय घंसौर में रेल अमान परिवर्तन के बाद बदले स्वरूप के चलते मुख्य बाजार स्थित समपार फाटक को बंद कर लगभग 170 मीटर दूरी पर बनाये गये अण्डर ब्रिज से आवागमन में आ रही परेशानी के चलते, अब लोगों का आवागमन शारदा मंदिर से काली मंदिर होते हुए मुख्य सड़क से बढ़ गया है।

शारदा मंदिर से लेकर मुख्य सड़क तक रेल मार्ग से सटे इस वर्षों पुरानी कच्चे मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि संपूर्ण मार्ग दलदल में तब्दील हो गया है। जगह – जगह गड्ढों में पानी भरने की वजह से आवागमन बाधित हो रहा है, फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर इस शॉर्टकट मार्ग से ही आवागमन करते हैं। यदि इस मार्ग से मुख्य सड़क तक जाना है तो केवल 400 मीटर का सफर तय करना पड़ता है। अन्य मार्गों से दूरी एक किलो मीटर तक हो जाती है, इससे समय लगता है।

सड़क के खराब होने के कारण नागरिक और स्कूली बच्चे समय और दूरी बचाने के लिहाज से पटरियों से सफर करने को मजबूर हैं। पटरियों में जबलपुर से यात्री रेल का आवागमन होता है। इसके अलावा बरेला पावर प्लांट के कारण मालगाड़ियां भी लगातार आती जाती रहती हैं। इसके कारण किसी भी हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।

सौ साल पुराना है रास्ता : स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह मार्ग सौ साल से भी अधिक पुराना है किंतु जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा के चलते मार्ग का निर्माण नहीं हो पाया है। रोजगार गारंटी योजना के प्रारंभ होने के कुछ वर्ष बाद सड़क का निर्माण मुरम व डस्ट डालकर कराया गया था लेकिन मार्ग पुनः बदहाल हो गया।

अब तक मार्ग पर किसी तरह का कार्य नहीं कराया गया। इसके चलते लोग दलदल युक्त मार्ग से ही आवागमन कर रहे हैं। शॉर्टकट होने के कारण यह मार्ग दिन भर व्यस्त रहता है। घंसौर की 70 फीसदी आबादी के लिये यह मार्ग महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मार्ग से अस्पताल, पुलिस थाना, स्कूल, विटनरी हॉस्पिटल, बिजली ऑफिस, बैंक, उचित मूल्य दुकान सरकारी संस्थानों की दूरी आधे से कम हो जाती है।

इधर, रेलवे व ग्राम पंचायत एक दूसरे पर मामले का दोषारोपण कर रहे हैं। रेलवे का कहना है कि यह काम पंचायत को कराना चाहिये वहीं ग्राम पंचायत इस चार सौ मीटर की रोड को रेलवे की संपत्ति बता रहा है। इसके कारण पूरी रोड लावारिस की तरह पड़ी हुई है जिसकी सुध कोई नहीं ले रहा है।

इसके कारण लोगों को जोखिम उठा कार्यालय, दुकान और स्कूल जाना पड़ रहा है। वैसे अब ग्राम पंचायत इस मामले में रेलवे से बात कर फौरन ही कोई हल निकालने की बात कह रही है लेकिन उसके लिये भी पंचायत द्वारा सार्थक पहल नहीं की जा रही है। क्षेत्र वासियों का कहना है कि पंचायत व रेल प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है तब कार्यवाही करेगा।