अब मिलावटखोरों को आजीवन कारावास की सजा का प्रस्ताव!

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मिलावटखोरी को लेकर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में हुई कार्रवाई के बाद अब पुलिस को और अधिकार देने की तैयारी चल रही है। इसमें आईपीसी की धारा में बदलाव कर पुलिस को कार्रवाई के लिए संज्ञेय अपराध यानी हस्तक्षेप करने योग्य अपराध की श्रेणी में लाने का विचार चल रहा है।

वहीं पड़ोसी राज्यों की तरह मिलावटखोरों को सख्त सजा आजीवन कारावास देने का प्रस्ताव बनाया गया है। अभी यह मामला पुलिस मुख्यालय से मंत्रालय भेजा गया है।

प्रदेश में हाल ही में नकली दूध, मिलावटी मावा व पनीर की फैक्ट्रियां पकड़ी गईं। इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट, खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। मगर बड़े पैमाने पर मिलावट की सामग्री बनाने वाले और उसके व्यापार में संलग्न गिरोह तक पहुंचने वाली एसटीएफ असहाय दिखाई दी, क्योंकि आईपीसी की धारा 272 और 273 में इसे असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

इसमें पुलिस पूरी तरह से स्वास्थ्य के अमले पर निर्भर रहती है, जिससे सूचना मिलने के बाद कार्रवाई में देरी होती है। इससे मिलावटखोरों को भागने व मिलावट की सामग्री को ठिकाने लगाने का मौका मिल जाता है। भिंड-मुरैना में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद मुुख्य आरोपी अब तक नहीं पकड़े जा सके हैं।

सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ के नकली दूध, मिलावटी मावा और पनीर की फैक्ट्रियां पकड़ने की कार्रवाई में आई परेशानियों के बाद ही एक प्रस्ताव तैयार किया गया। इसमें खानपान की सामग्री बनाने और बेचने वालों पर आपराधिक कार्रवाई के लिए आईपीसी के धारा 272 व 273 तथा दवा बनाने व बेचने वालों पर कार्रवाई की धारा 274 व 275 में परिवर्तन करने को लिखा गया है।

आईपीसी की इन धाराओं में उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा सहित कुछ अन्य राज्यों ने बदलाव किया है। यहां खानपान या दवाओं में मिलावट करने वालों के लिए आईपीसी में पुलिस के लिए संज्ञेय और गैर जमानती अपराध माना गया है।

साथ ही आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान रखा गया है। मप्र में अभी इन धाराओं के अपराध में अधिकतम छह महीने की सजा होने से आसानी से जमानत मिल जाती है। पुलिस के लिए असंज्ञेय अपराध होने से वह हस्तक्षेप ही नहीं कर सकती और स्वास्थ्य अमले पर निर्भर रहती है। चूंकि मामला गृह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र का है, लिहाजा इसमें देरी की आशंका जताई जा रही है।

मिलावटखोरी को रोकने के लिए प्रदेश सरकार के सभी विभाग एक हैं। मिलावटखोरों को आजीवन कारावास दिलवाने और पुलिस को कार्रवाई के अधिकार दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे।

तुलसी सिलावट,

स्वास्थ्य मंत्री

खानपान की सामग्री और दवा बनाने व बेचने वालों पर कार्रवाई आईपीसी की धाराओं में असंज्ञेय अपराध है, जिससे पुलिस कार्रवाई नहीं कर पाती। मिलावटखोरी रोकने आईपीसी की धाराओं में परिवर्तन का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

अशोक अवस्थी,

एडीजी, एमपी एसटीएफ.