पेंशनर्स की सुनवायी को नहीं कोई तैयार!

 

 

 

काँग्रेस-भाजपा ने भी फेरा पेंशनर्स की ओर से मुँह!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला चिकित्सालय प्रशासन के द्वारा पेंशनर्स को निःशुल्क दवाएं देने के मामले में मनमाने नियमों के थोपे जाने के बाद लगभग ढाई साल से पेंशनर्स दवा के लिये भटक ही रहे हैं। इसके बाद भी सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा विपक्ष में बैठी काँग्रेस भी पेंशनर्स की सुध लेने को तैयार नहीं दिख रही है।

पेंशनर्स ढाई साल से अधिक समय से दवाओं के लिये यत्र-तत्र भटकने पर मजबूर हैं लेकिन भाजपा – काँग्रेस के नेताओं सहित सिवनी विधायक दिनेश राय भी इस मामले में मौन ही हैं।

जिला चिकित्सालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि स्वास्थ्य संचालनालय में पदस्थ अपर संचालक (औषधि प्रशासन) के द्वारा 26 दिसंबर 2012 को समस्त सीएमएचओ एवं सिविल सर्जन को दीनदयाल अंत्योदय योजना के हितग्राहियों, पेंशनर्स एवं सरकारी कर्मचारियों को दवाएं उपलब्ध करवाने के संबंध में निर्देश जारी किये गये थे।

इन निर्देशों के अनुसार 17 नवंबर 2012 से सरदार वल्लभ भाई पटेल निःशुल्क औषधि वितरण योजना का आगाज़ किया गया था। इसके तहत यह कहा गया था कि सरकारी अस्पताल में आने वाले हर रोगी को निरंतर दवाएं उपलब्ध कराना सिविल सर्जन और सीएमएचओ का दायित्व है।

दवाएं उपलब्ध करवाने में स्पष्टता के अभाव के चलते अपर संचालक के द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुसार 90 से 95 प्रतिशत रोगियों को एसेंशियल ड्रग लिस्ट (ईडीएल जिसमें 438 दवाओं की सूची है) में उपलब्ध दवाओं के जरिये मरीज़ों का उपचार किया जा सकता है।

अपर संचालक के इस पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया है कि ऐसी बीमारियां जिसमें रोगी लंबे समय से उपचार (प्रोलॉग ट्रीटमेंट) में कोई विशेष ब्राण्ड की दवा ले रहे हैं तो उन्हें इस तरह की दवा को लिखा (प्रिस्क्राईब) जा सकता है। इसके अलावा ऐसी पेटेंट दवाएं जिनका जेनेरिक विकल्प उपलब्ध न हो, को भी लिखा जा सकता है।

इसके साथ ही अपर संचालक के इस पत्र में इस बात का उल्लेख भी किया गया है कि ट्रेटरी केयर में उपचाररत अथवा फॉलोअप के रोगियों के लिये यदि विशेषज्ञ की राय है कि जेनेरिक विकल्प रोगियों के लिये उपर्युक्त नहीं होंगे तो इन परिस्थितियों में पेटेन्ट दवाओं को लिखा जा सकता है। इस पत्र की पाँचवीं कण्डिका में इस बात का उल्लेख साफ तौर पर किया गया है कि पेंशनर्स को इसके अनुसार दवाईयां शासकीय व्यय पर उपलब्ध करवायी जा सकेंगी। अपर संचालक के द्वारा इस आदेश के कड़ाई से पालन की बात भी आदेश में कही गयी है।