स्कूलों में फिर अनिवार्य होगी ई-अटेंडेंस, तैयारियों में जुटा विभाग

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। एक बार फिर से शिक्षकों के लिये ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने की तैयारियां आरंभ कर दी गयी हैं। संभवतः अगले शिक्षण सत्र से ई-अटेंडेंस की व्यवस्था सख्ती से शिक्षकों में लागू कर दी जायेगी।

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति बहुत कम है, इस वजह से पढ़ायी में इसका सीधा असर पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों ने अपनी जाँच में भी यह पाया था कि 55 फीसदी शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं और कुछ ऐसे शिक्षक हैं जो स्कूल तो जाते हैं परंतु आधे समय के बाद ही घर लौट जाते हैं।

इसलिये डर रहे कई शिक्षक : मोबाईल शिक्षक एप के माध्यम से ई अटेंडेंस को लेकर शिक्षक इसलिये भयभीत हैं कि इससे उनके आने – जाने की पोल खुल जायेगी। इस सॉफ्टवेयर से शिक्षक की लोकेशन भी पता चलेगी कि वह स्कूल में रहकर अटेंडेंस दे रहा है या कहीं ओर से। जिले में अधिकांश शिक्षक घर के काम निपटाकर सुबह 10 बजे की जगह साढ़े 11 बजे तक आराम से स्कूल पहुँचते हैं। शाम साढ़े 04 बजे तक रुकने की जगह 03 बजे ही वे गायब हो जाते हैं और कक्षाएं अतिथि शिक्षकों के लिये छोड़ देते हैं।

तैयारियों में जुटा शिक्षा विभाग : सूत्रों का कहना है कि विभिन्न संवर्ग के शिक्षकों के मोबाईल नंबरों को अपडेट कर सर्वर से फिर जोड़ने का काम किया जायेगा। मॉनिटरिंग के लिये भोपाल में मुख्य सर्वर लगाये जाने की तैयारी हो रही है तो वहीं हर जिले में सभी संकुल स्तर पर डीडीओ के कम्प्यूटर में ऑनलाईन सॉफ्टवेयर लगाये गये हैं जहाँ से डीडीओ, डीईओ एवं जेडीई स्तर पर मॉनिटरिंग होगी।

2015 से लागू, कब-कब हुई बंद : शिक्षक, कर्मचारियों को समय पर स्कूल पहुँचाने के लिये ई – अटेंडेंस व्यवस्था सितंबर 2015 में आरंभ की गयी थी। नेटवर्क, पासवर्ड जैसी तकनीकी समस्या के चलते ये प्रभावी नहीं हो सकी। 2016 में अध्यापकों की जनहित याचिका पर ग्वालियर हाई कोर्ट ने ई अटेंडेंस पर रोक लगा दी थी। 2017 में फिर इसे सख्ती से लागू किया गया।

एक अपै्रल 2018 को मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद फिर अटेंडेंस व्यवस्था ठण्डे बस्ते में चली गयी। फिर इसे 11 जून से लागू कर दिया गया। 2018 के जून – जुलाई माह में शिक्षकों के भारी विरोध के बाद तत्कालीन सरकार को एक बार फिर से अपना निर्णय बदलना पड़ा था।