वन्यजीवों को बचाना होगा

 

जंगलों में लगी आग इंसानों और संपत्ति, दोनों के लिए भयावह क्षति है। ऑस्ट्रेलिया को उन अनोखे देशी जानवरों को बचाने के लिए भी बहुत कुछ करना होगा, जो आज खतरे में हैं। किसी को भी ठीक से पता नहीं है कि जंगलों में लगी आग के कारण लगभग एक करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में कितने जानवरों की मौत हो चुकी है। विश्वसनीय वैज्ञानिकों को आशंका है कि यह संख्या बहुत ज्यादा होगी। इस आग ने हजारों न सही, सैकड़ों की तादाद में दुर्लभ ऑस्ट्रेलियाई वन्यजीवों को खत्म कर दिया है। जो जीव बचे हैं, उनके घरौंदे-ठिकाने बर्बाद हो गए हैं। ऐसी क्षति हुई है कि जिसकी पूर्ति संभव नहीं है। 

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में कंगारू द्वीप पर, जो वन्यजीवों के लिए एक लिए अच्छा आश्रय स्थल है, हजारों की तादाद में कोआला और कंगारू मारे गए हैं। द्वीप पर रहने वाले छोटे जीवों को भी आग ने खत्म कर दिया है। ये जीव भोजन-पानी के स्रोत के खत्म होने के बाद जिंदा रहने में नाकाम हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया का एक नैतिक कर्तव्य है कि वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन जीवों को संरक्षित करे। यदि इस काम में देश नाकाम रहता है, तो दुनिया में इसकी बहुत निंदा होगी।

जले और झुलसे जीवों के चित्र पूरी दुनिया में वायरल हो रहे हैं। विदेश में उनके प्रति बहुत सहानुभूति उमड़ रही है। अच्छा है, संघीय सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है। बचाव कार्य के लिए ज्यादा धन देने का वादा किया है। एक ऐसे आयोग की स्थापना होगी, जो दुर्लभ प्रजाति के जीवों को इस संकट से उबारने और उनके घरौंदे-ठिकाने संवारने के लिए सलाह देगा। दुर्लभ प्रजाति के जीवों को बचाने के लिए चिड़ियाघरों में प्रजनन कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनमें स्वेच्छा से आम लोग भी स्वयंसेवक के रूप में शामिल हो सकेंगे। अभी खतरे में पड़े जीवों वाले प्रभावित इलाकों में जरूरी आहार गिराया जा रहा है। खतरा उन जीवों पर ज्यादा है, जो जंगल से बाहर नहीं जी सकते। उस दुर्लभ जीव कोआला को भी बचाने की जरूरत है, जो ऑस्ट्रेलिया की पहचान है। (द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड, ऑस्ट्रेलिया से साभार) 

(साई फीचर्स)

 

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