कलाकारों ने गीत गज़लों की दी प्रस्तुति

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नगर के बारापत्थर स्थित निज़ि लॉन में शनिवार को राष्ट्रीय, प्रदेश व संभाग स्तर पर जिले की पहचान बनाने वाले कलाकारों के गीत – गजलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

केवलारी विधायक राकेश पाल सिंह व पूर्व जिला सत्र न्यायाधीश प्रवीण शाह, समाजसेवी सुनील नाहर ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। श्री गणेश, देवी सरस्वती की वंदना से कार्यक्रम का आगाज किया गया। रचनाकार राजेंद्र नेमा क्षितिज ने सौंधी माटी की सुगंध, साथ संजोकर आई मेरे गाँव से हवा हो न हो होकर आयी को।

अरूण चौरसिया प्रवाह की रचना घोल दिया है विष क्यों तुमने इन मदमाते प्यालों में इनसे ज्यादा जहर भरा है मेरे पांव के छालों में जिसे पराग कटरे ने पूरी तनमयता से सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। रचनाकार यूसुफ राज की रचना वेवजह आंसुओं को बहाते नहीं ये वो मेहमान हैं जो रोज आते नहीं इसे भी अजय विश्वकर्मा ने गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध किया।

सूफी रियाज मोहम्मद निदा की रचना हमारे प्यार की तनवीर देखने आना, हमारे प्यार की तस्वीर देखने आना को उपस्थितजनों ने सराहा। यूसुफ राज की हालात के मारों पे मत हंसा करना हालात उसी दौर में रख देते हैं लाकर, अभिनय श्रीवास्तव अश्क ने जब उजाला खुद अंधेरों का मुहाफिज हो गया में कफन के छोर में ढ़ककर सबेरा सो गया, राजेन्द्र नेमा क्षितिज ने तुम्हारा नाम लिखकर मिटाना याद वो आया, भुलाने का तुम्हें करना बहाना याद वो आया की प्रस्तुति दी। प्रतिमा अखिलेश की रचना शहरी हवा भूल जेहो ओ मेरी गुंइया, मसूद आतिश की रचना सर्दी की सर्द रात में वो जागता रहा कुछ चीथड़ों से अपना बदन ढांकता रहा ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध का दिया। कार्यक्रम का संचालन कवि यूसुफ राज ने किया।

गीत व गजलों को सुर व संगीत देने वालों में तबले पर मनीष विश्वकर्मा, गिटार पर पराग कटरे व पैड पर हर्ष बिसेन शामिल रहे।