नहीं सुलझ पा रही प्रभारी मंत्री के फर्जी लेटरहेड की गुत्थी!


अबूझ पहेली बना प्रभारी मंत्री के फर्जी लेटरहेड का मामला
(अखिलेश दुबे)


सिवनी (साई)। जनपद पंचायत छपारा की तुलफ रैयत पंचायत के सचिव सलीम करैशी को जनपद पंचायत घंसौर की ग्राम पंचायत झिझरई किए गए स्थानांतरण को रूकवाने की अनुशंसानात्मक पत्र की गुत्थी आज भी अनसुलझी ही है। इस मामले में दो लोगों से पूछताछ जारी है।
उक्ताशय की बात पुलिस के भरोसेमंद सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताते हुए कहा कि यह मामला प्रशासन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। इस मामले में जिस तरह से मंथर गति से जांच आगे बढ़ रही है उसे देखते हुए यह कहना मुश्किल ही है कि जांच कब तक पूरी हो पाएगी!
सूत्रों के द्वारा मामले के संबंध में जो जानकारी समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताई है उसके अनुसार ग्राम पंचायत तुलफ रैयत के सचिव सलीम कुरैशी का तबादला प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर जनपद पंचायत घंसौर की ग्राम पंचायत झिझरई कर दिया गया था।
सूत्रों ने कहा कि तबादला रूकवाने के लिए सचिव के द्वारा यहां वहां हाथ पैर मारे जा रहे थे, इसी बीच उनका संपर्क छपारा के शैलेंद्र उर्फ सिल्लू ठाकुर से हुआ। शैलेन्द्र के द्वारा सलीम कुरैशी को तबादला रूकवाने के लिए इमली पठार के निवासी इस्माईल से मिलवाया गया।
सूत्रों ने आगे कहा कि इस्माईल के द्वारा सलीम कुरैशी से सौदा तय कर उनका तबादला निरस्त करवाने के लिए सिवनी के प्रभारी मंत्री के भोपाल स्थित कार्यालय में सलीम कुरैशी का आवेदन पत्र जमा करवा दिया गया। इसके बाद इस्माईल के द्वारा सल्लू ठाकुर को व्हाट्स ऐप पर प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश सकलेचा के द्वारा की सलीम कुरैशी का तबादला निरस्त करने की अनुशंसा का पत्र भेज दिया गया। सल्लू ठाकुर ने उक्त पत्र सलीम कुरैशी को भेजा गया।
सूत्रों ने बताया कि जैसे ही सलीम कुरैशी को वह पत्र व्हाट्स ऐप के जरिए मिला, उनके द्वारा इसका प्रिंट निकाला जाकर पत्र को जिला पंचायत में भेजकर स्थानांतर निरस्त होने की बाट जोही जाने लगी, पर उनका यह दांव उलटा ही पड़ा। जिला पंचायत के द्वारा प्रभारी मंत्री के कार्यालय से दरयाफ्त करने के बाद इस पत्र को फर्जी करार दिया जाकर पुलिस को इसकी सूचना दे दी गई।
सूत्रों की मानें तो जिला पंचायत के द्वारा इस पत्र को फर्जी करार दिए जाने के पीछे ठोस आधार यह रहा कि प्रभारी मंत्री के द्वारा ही जिले के चुने हुए वरिष्ठ अधिकारियों को दो टूक शब्दों में यह कह दिया गया था कि उनके द्वारा अनुमोदित तबादलों को निरस्त करने की अनुशंसा वे कतई नहीं करेंगे, और अगर तबादलों को निरस्त करने की अनुशंसा लेकर कोई आता है तो उसे फर्जी ही समझा जाए।
पुलिस के भरोसमंत्र सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि चूंकि इस आदेश जिसे फर्जी कहा जा रहा है का आदान प्रदान सोशल मीडिया के व्हाट्सऐप प्लेटफार्म के जरिए हुआ है इसलिए पुलिस के लिए यह पता लगाना बहुत मुश्किल नहीं है कि जो संदेश सलीम कुरैशी को मिला और उनके द्वारा जिला पंचायत में जिसका प्रिंटआऊट जमा करवाया गया था उस आदेश की उतपत्ति किस जगह से हुई है। बावजूद इसके यह मामला अभी भी अनसुलझी पहेली बनकर रह गया है।