मरीजों के परिजन कोस रहे भाजपा को!

 

सिवनी जिले में पदस्थापना कराने हाथ-पैर मार रहे डॉ.श्रीवास्तव

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। लगभग डेढ़ दशक से प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे डॉ.राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव अब जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन बन चुके हैं। डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के अधीक्षण (सुपरविजन) पर अनेक सवालिया निशान लग रहे हैं। एक मरीज के परिजन ने शुक्रवार को अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार केवलारी के ग्राम झोला के पास शुक्रवार की शाम लगभग साढ़े चार बजे एक सड़क दुर्घटना में मोटर साईकिल सवार घायल हो गये। इन घायलों को पहले केवलारी अस्पताल में दिखाया गया वहाँ से इन्हें जिला चिकित्सालय रिफर कर दिया गया।

बताया जाता है कि इसी बीच घायलों में से एक दीप सिंह (27) पिता लक्ष्मी प्रसाद ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के द्वारा दीप सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। मरीज के परिजनों के द्वारा चिकित्सक की इस बात पर यकीन नहीं किया गया। इस दौरान अस्पताल चौकी से पुलिस के प्रधान आरक्षक यशवंत सिंह के द्वारा परिजनों को समझाने का प्रयास किया गया किन्तु परिजन नहीं माने।

परिजनों के द्वारा इसके बाद बताया जाता है कि अस्पताल में हंगामा करना आरंभ कर दिया गया। मृतक के परिजन दीप सिंह को वहाँ से चुपचाप उसे लेकर जबलपुर जाने की तैयारी कर रहे थे। मौके पर मौजूद चिकित्सकों और पेरामेडीकल स्टॉफ के द्वारा परिजनों को समझाने का प्रयास किया गया किन्तु वे नहीं माने।

बताया जाता है कि हंगामे की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुँच गयी और मृतक का ईसीजी किया गया जिसके बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किये जाने की पुष्टि पुनः की गयी। मृतक के परिजनों के द्वारा ईसीजी पर चिकित्सक से यह लिखवा कर लिया गया कि उनके दीपसिंह की मौत हो चुकी है। इसके उपरांत मरीज के परिजनों के द्वारा जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों पर ऐतबार न करते हुए यह लिखकर दे दिया गया कि अगर मौत हो गयी है तो वे जबलपुर के चिकित्सकों से इसकी तसदीक करने के बाद ही मानेंगे और वे मृतक को लेकर जबलपुर चले गये।

उल्लेखनीय होगा कि जबसे डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का पदभार ग्रहण किया गया है उसके बाद से जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं मानो लड़खड़ा चुकी हैं। मूलतः हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.आर.के. श्रीवास्तव अब जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन हैं और उनकी पदस्थापना के बाद जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाएं पटरी पर लौटती नहीं दिख रही हैं।

अस्पताल मंें मरीजों के परिजनों के द्वारा अस्पताल की लचर व्यवस्थाओं के चलते सीधे-सीधे भाजपा सरकार को ही कोसा जा रहा है। अस्पताल में आये दिन होने वाले विवादों के कारण अब चर्चाएं इस तरह की भी चल पड़ी हैं कि प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रहे वर्तमान सिविल सर्जन डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा जिस तरह से स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में कथित तौर पर अनदेखी की जा रही है उससे लोग भाजपा से ही विमुख होते दिख रहे हैं।

माँग की जा रही है कि जिला चिकित्सालय में किसी अन्य सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की पदस्थापना करवायी जाये ताकि जिला मुख्यालय की स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी पर आ सकें।

कहा तो यहाँ तक भी जा रहा है कि सिविल सर्जन डॉ.आर.के. श्रीवास्तव की पदस्थापना सिवनी में बतौर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी हुई थी। अब जबकि डॉ.के.सी. मेश्राम ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है तब डॉ.आर.के. श्रीवास्तव का वेतन किस पद के विरूद्ध निकलेगा, यह विचारणीय है!

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अमूमन अस्पताल में पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक को ही सिविल सर्जन का प्रभार दिया जाता है। जिला चिकित्सालय की स्थापना में सिविल सर्जन का पद पृथक से सृजित नहीं होने से अब समस्या यह आ रही है कि नवंबर माह का डॉ.आर.के. श्रीवास्तव का वेतन किस मद से निकलेगा!

सूत्रों ने बताया कि डॉ.आर.के. श्रीवास्तव के द्वारा अब आला अधिकारियों को साधकर अपनी पदस्थापना बतौर चिकित्सक सिवनी जिले में कराये जाने का ताना-बाना बुना जा रहा है। उधर, भोपाल से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रमुख सचिव गौरी सिंह और सचिव कवींद्र कियावत भी सिवनी जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं से बुरी तरह खफा ही हैं।



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