पुराने का हिसाब मिला नहीं नये की सुगबुगाहट!

आशादीप आज भी गुजर रहा बुरे दौर से, अब अस्पताल के कायाकल्प की योजना!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिले में उपलब्ध संसाधनों से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बजाय जन भागीदारी के जरिये कुछ नया करने का ताना – बाना बुना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिला अस्पताल का कायाकल्प लगभग ढाई करोड़ रूपये की लागत से करने की कवायद की जा रही है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला अस्पताल को कलरफुल बनाने और बिल्डिंग के रंग रोगन, बिस्तर, फर्नीचर आदि को फाईव स्टार हॉस्पिटल की तर्ज पर बनाने के लिये स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ढाई करोड़ रूपये की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में बिना कुछ व्यय किये वर्तमान में ही उपलब्ध संसाधनों एवं जो संसाधन राज्य शासन के द्वारा स्वीकृत हैं उनके जरिये ही अस्पताल को चाक चौबंद किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा चिकित्सकों और पेरामेडिकल स्टॉफ को ही पाबंद कर दिया जाता तो हालात काफी हद तक पटरी पर आ सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा जन भागीदारी एवं जन सहयोग से जिला अस्पताल के कायाकल्प की योजना बनायी गयी है। इससे बेहतर तो यह होता कि केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा स्वास्थ्य महकमे को दी जाने वाली इमदाद का ही उचित तरीके से उपयोग करवा दिया जाता।

सूत्रों ने बताया कि 1995 में तत्कालीन जिला कलेक्टर एम.मोहन राव के द्वारा अस्पताल का कायाकल्प किया गया था। उस समय उनके द्वारा जिला ड्रग एसोसिएशन के सहयोग से अस्पताल में पलंग, गद्दों और अन्य फर्नीचर को बदला गया था। इसके बाद 1997 में तत्कालीन जिला कलेक्टर मोहम्मद सुलेमान के द्वारा अस्पताल में दिलचस्पी ली गयी थी।

मोहम्मद सुलेमान के कार्यकाल में जिला अस्पताल में गहन चिकित्सा ईकाई के अलावा रोगी कल्याण समिति को आर्थिक रूप से संपन्न करने के लिये अस्पताल की चारदीवारी को तोड़ा जाकर यहाँ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया गया था।

2005 में तत्कालीन जिलाधिकारी जी.के. सारस्वत की नजरें अस्पताल पर इनायत हुईं थीं। उनके द्वारा लोगों के लाख विरोध के बाद भी अस्पताल के पूरे कॉरीडोर को बाँस की जाफरी लगाकर बंद करवा दिया गया था, जिसके चलते सभी वार्डों में ताजी हवा आना लगभग बंद हो गयी थी और सफोकेशन के कारण लोग असहज हो रहे थे।

2017 में तत्कालीन जिला कलेक्टर धनराजू एस. के द्वारा अवश्य जिला अस्पताल में काफी काम आरंभ करवाये गये थे। उनके द्वारा अस्पताल के संबंध में स्थानीय नागरिकों से मशविरा करने के बाद वर्तमान इमरजेंसी भवन के सामने वाले स्थल जहाँ कचरा पड़ा रहता था उसे समतल कराकर यहाँ पार्किंग की व्यवस्था करायी गयी थी।

बहरहाल, सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ढाई करोड़ रूपये की लागत से अस्पताल में रंग रोगन, फर्नीचर आदि की व्यवस्थाएं करने का मन बनाया गया है। इस राशि में से कुछ राशि विधायक निधि से, कुछ रोगी कल्याण समिति के जरिये और बाकी राशि की व्यवस्था के लिये किसी नामी गिरामी हस्ती के एक कार्यक्रम की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि इसके पहले आशादीप विशेष विद्यालय को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिये तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा 14 नवंबर 2015 को दृष्टि नामक कार्यक्रम करवाया गया था। इस कार्यक्रम के लिये करोड़ों रूपये के चंदे की बात भी सामने आयी थीं।

सूत्रों ने आगे कहा कि इस चंदे और खर्च का हिसाब आज साढ़े तीन साल बाद भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब अगर जिला अस्पताल के लिये इसी तरह के चंदे से किसी कार्यक्रम को करने की बात सामने आती है तो लोग पहले आशादीप के चंदे को सार्वजनिक करने की बात स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से कर सकते हैं . . .!

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