लेदर बॉल से युवाओं के लिये आयोजित करवायीं जायें क्रिकेट की प्रतियोगिताएं

Shikan
सिवनी में वास्तविक क्रिकेट दम तोड़ता दिख रहा है और टेनिस बॉल आदि से खेला जाने वाला क्रिकेट का खेल फलता फूलता दिख रहा है। ऐसी स्थिति में जिला क्रिकेट संघ सिवनी की खामोशी भरी निष्क्रियता कई सवालों को जन्म तो दे ही रही है साथ ही कई खिलाड़ियों का भविष्य भी बिना उभरे चौपट हुआ जा रहा है। मुझे जिला क्रिकेट संघ सिवनी की भूमिका से ही शिकायत है।
दरअसल हाल ही में वेटरन्स वर्ग में भी क्रिकेट प्रतियोगिताएं खेली गयीं लेकिन युवाओं के लिये अभी भी सुनहरा भविष्य बाट जोहता दिख रहा है। जिला क्रिकेट संघ सिवनी तो वर्षों से नींद के आगोश में डूबा हुआ नज़र आ रहा है। स्थिति यह है कि अब तो खिलाड़ियों ने भी जिला क्रिकेट संघ से उम्मीद ही छोड़ दी है कि उसके द्वारा खिलाड़ियों के हित में कोई प्रयास किये जायेंगे।
ऐसी धूमिल उम्मीदों के मध्य सिवनी में वेटरन्स क्रिकेट प्रतियोगिताएं खेली गयीं जिससे चालीस की उम्र पार कर चुके खिलाड़ियों की खेलने की उत्सुकता काफी हद तक पूरी भी हुई होगी लेकिन असली भविष्य तो युवाओं के लिये अभी भी रास्ता तक रहा है। प्रतियोगिता के अभाव में कई प्रतिभाओं के लिये समय निकलता जा रहा है जिसकी जिला क्रिकेट संघ सिवनी को कतई चिन्ता नहीं दिखती है। ऐसे में हाल ही में खेली गयीं प्रतियोगिताओं के आयोजकों से युवा आशा कर रहे हैं कि निराशा के इन लम्हों में वे ही उम्मीद की कोई किरण युवाओं को दिखायेंगे ताकि युवा भी अपने अंदर छुपी हुई प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
युवाओं या बच्चों के लिये लेदर बॉल से क्रिकेट की कोई प्रतियोगिता आयोजित करवायी जाती है तो उससे एक अच्छा मैसेज ये भी जायेगा कि आयोजक, युवाओं के भविष्य के लिये भी चिंतित हैं क्योंकि आगे बढ़ने के लिये वर्तमान में यदि किसी के पास मौका है तो वे बच्चे एवं युवा ही हैं। क्रिकेट प्रतियोगिताओं में किसी भी नियम को शिथिल किये जाने की परंपरा की शुरूआत करने से बचा जाना चाहिये। यदि क्रिकेट की तरह ही खेला जायेगा तो उसका रोमांच भी कई गुना बढ़ जायेगा। यही नहीं बल्कि इसके पीछे एक विशेष कारण यह भी है कि नियमानुसार क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों को सीखने के लिये भी बहुत कुछ मिल जायेगा।
कुल मिलाकर आवश्यकता इतनी ही है कि बच्चे एवं युवा खिलाड़ियों के भविष्य को देखते हुए उनके लिये लेदर बॉल से ही क्रिकेट की प्रतियोगिताएं आयोजित करवायीं जाना चाहिये। इसके साथ ही कुंभकर्णीय निद्रा में लीन जिला क्रिकेट संघ सिवनी के पदाधिकारियों को भी जगाने की आवश्यकता है ताकि उसकी देख-रेख में नीरस कर दिये गये क्रिकेट जगत में नयी प्राणवायु का संचार किया जा सके।
आरिफ अंसारी