स्कूल से घर 03 किमी दूर हो या 10, सभी से एक जैसी हो रही वसूली!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शहर के निजि स्कूलों ने स्कूल बसों को कमाई का धंधा बना रखा है। ज्यादातर स्कूल छात्रों से बस सुविधा के नाम पर मनमानी फीस वसूलते हैं लेकिन बसों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जानकारों के मुताबिक निजि स्कूल एक बस पर प्रतिमाह 05 से 15 हजार रुपये का लाभ कमाते हैं। यह स्थिति तब है जब कॉमर्शियल वाहनों के मुकाबले स्कूल बसों से नाममात्र टैक्स लिया जाता है।

स्कूलों की बस फीस को लेकर कोई तय मापदण्ड नहीं हैं। कुछ स्कूल अपने सभी छात्रों से एक जैसी बस फीस वसूलते हैं भले ही छात्र तीन किलोमीटर दूर से आता हो या 10 किलोमीटर दूर से। इस तरह कई स्कूल छात्रों से 05 हजार से 08 हजार रुपये तक की वार्षिक फीस वसूल रहे हैं। प्रत्येक स्कूल बस में ड्राईवर, हेल्पर के अलावा महिला कर्मचारी की अनिवार्यता की गयी है। एक बस में इन कर्मचारियों के वेतन पर स्कूल को प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपये खर्च करना पड़ते हैं।

जानकारों का मानना है कि बसों के डीजल और मेंटेनेंस पर महज 08 से 10 हजार रुपये का खर्च आता है। इस तरह स्कूल की एक बस का प्रतिमाह का खर्च 25 से 35 हजार रुपये होता है। स्कूलों द्वारा बस सुविधा के नाम पर औसतन प्रतिमाह 1500 रुपये लिये जा रहे हैं। यदि इसे औसत किराया माना जाये तो हर महीने 32 सीटर बस में आने-जाने वाले बच्चों से हजारों रुपएये लिये जा रहे हैं। इस तरह स्कूलों को एक बस से दोगुना फायदा हो रहा है।

एक स्कूल बस के प्रतिमाह का खर्च : जानकारों की मानें तो चालक को 06 हजार, परिचालक को 04 हजार, महिला कर्मचारी को भी 04 हजार इस तरह तीनों कर्मचारियों का वेतन 14 हजार रूपये ही होता है। इसके अलावा डीजल – ऑयल में हर माह लगभग आठ से दस हजार रूपये।

जीपीएस का चार्ज लगभग दो हजार रूपये, सीसीटीवी लगाने पर एक बार में तीन हजार रूपये, स्पीड गर्वनर के नाम पर चार से पाँच हजार एवं रखखाव में पाँच से दस हजार रूपये सालाना, फिटनेस के दो हजार रूपये सालाना, परिमट के लिये चार साल में एक बार 05 हजार एवं आरटीओ का कर एक रूपये प्रतिसीट प्रतिमाह के हिसाब से ही आता है।

पालकों का कहना है कि अधिकांश स्कूल निजि कंपनी के माध्यम से बसों का संचालन करते हैं। ऐसे में स्कूल छात्रों से फीस लेने के बाद कंपनी को कितना भुगतान करती है, इसके बिलों का ऑडिट किया किया जाना चाहिये।



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