बिटकॉइन मतलब ऐसी चीज का धंधा, जो है ही नहीं

(बालेन्दु शर्मा दधीच)

बिटकॉइन के मामले में सरकार ने हाथ झाड़ लिए हैं। उसने कहा है कि बिटकॉइन दरअसल पोंजी स्कीम जैसी है, जिसमें निवेश करने वाले पूरी तरह अपने जोखिम पर हैं। न तो बिटकॉइन को सरकार या रिजर्व बैंक से कोई मान्यता प्राप्त है, न ही यह कोई करेंसी है। सरकार का बयान रिजर्व बैंक और सेबी के पिछले बयानों जैसा ही है। मतलब यह कि अगर बिटकॉइन में निवेश करके उपभोक्ता वित्तीय रूप से बर्बाद होता है तो वह जाने, हमारी यहां कोई भूमिका नहीं! कल अगर बिटकॉइन का बुलबुला फूटता है और लाखों निवेशक बर्बाद होते हैं तो सरकार और रिजर्व बैंक के पास कहने के लिए होगा कि हमने तो पहले ही चेतावनी दी थी।

बहरहाल, बिटकॉइन के प्रति अलग-अलग सरकारों की समझ अलग-अलग दिखती है। चीन इसके कारोबार पर पाबंदी लगा चुका है तो रूस अपनी खुद की डिजिटल करेंसी लाने वाला है। दक्षिण कोरिया कठोर नियंत्रण लगाने की सोच रहा है। अमेरिका, भारत, ब्रिटेन जैसी सरकारें उपभोक्ताओं को इससे दूर रहने को कह रही हैं, हालांकि सेबी प्रमुख अजय त्यागी ने इसकी ब्लॉकचेन तकनीक को बढ़ावा देने की बात कही है।

सब कह रहे हैं कि कुछ भी हो सकता है, और यह सच भी है। क्योंकि तमाम निवेशक ऐसे क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं। ऐसी चीज का कारोबार कर रहे हैं जो है ही नहीं। वह तो महज एक तकनीकी कोड है, या यूं कहें कि एक अवधारणा। न उसकी दिशा का पता है न असल कीमत का। यकीन मानिए, बिटकॉइन आज भले ही 15 लाख रुपये के आसपास चल रहा हो, पर वह किसी भी समय शून्य में बदल सकता है। मगर लोग इसमें निवेश कर रहे हैं, यह सोचकर कि कम से कम उनके साथ ऐसा नहीं होगा। जब तक लोग खरीदते रहेंगे, गाड़ी चलती रहेगी। मगर कब तक?

बहुतों को लगता है कि खतरनाक आखिरी पड़ाव पर पहुंचने से पहले ही वे अपना मुनाफा बटोरकर गाड़ी से उतर चुके होंगे। लेकिन ऐसा कल ही हो गया तो? इस तरह का जोखिम लेना कोई नई बात नहीं। यह मानवीय स्वभाव है। इसी के तहत लोग घुड़दौड़, कसीनो और लॉटरी के टिकट से लेकर क्रिकेट मैचों की सट्टेबाजी तक में पैसे लगाते हैं। मगर क्या अपने नागरिकों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी बस इतनी ही है कि वह उन्हें चेतावनी देती रहे कि घुड़दौड़ अच्छी चीज नहीं है, इससे उनका सारा पैसा नष्ट हो सकता है। आखिर इन गतिविधियों के भी तो कुछ नियम-कायदे हैं।

भारत सरकार ने औपचारिकता भर निभा दी है। जरूरत समग्र नजरिया अपनाने और ज्यादा जिम्मेदारी दिखाने की थी। निवेशकों के बीच जागरूकता उसने जरूर पैदा की है लेकिन उसे उनके हितों को सुरक्षित करने की बात भी सोचनी चाहिए। डिजिटल मुद्राओं का विनियमन लगभग असंभव है और भारत शायद ही चीन की तरह इन पर पाबंदी लगाए, क्योंकि खुली अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खुद निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। फिर भी सरकार की कई जिम्मेदारियां हैं।

मिसाल के तौर पर निवेशकों को आपराधिक कृत्यों से सुरक्षा देने की जिम्मेदारी। वह इन मुद्राओं के कारोबार को प्लैटफॉर्म देने वाले ऐप्स या एक्सचेंजों को शेयर बाजारों की तरह जवाबदेह बना सकती है। वह उन्हें कह सकती है कि वे इस माहौल में निवेशकों से बेजा फायदा न उठाएं। हो सकता है, कल को ऐसा कोई एक्सचेंज लाखों निवेशकों का धन लेकर इंटरनेट के अंधेरे में गुम हो जाए। या फिर उसका प्लैटफॉर्म तकनीकी दृष्टि से पर्याप्त सक्षम न हो और वह निवेशकों की डिजिटल करेंसी को सुरक्षित न रख पाए। लाखों में खरीदी हुई डिजिटल करेंसी को सुरक्षित रखना बहुत बड़ी चुनौती है। किसी सिस्टम में मौजूद कमजोरी निवेशकों को रातोंरात दिवालिया बना सकती है।

आखिर यह बिटकॉइन है क्या? सिर्फ एक एनक्रिप्टेड (सुरक्षित रखा गया) तकनीकी कोड। इस पर दुनिया भर के हैकरों की निगाहें हैं। इसके अलावा निवेशक प्लैटफॉर्म के भी शिकार हो सकते हैं। फर्ज कीजिए, बिटकॉइन की कीमत में अचानक भारी गिरावट आती है और कोई निवेशक तुरंत अपने बिटकॉइन बेचकर सुरक्षित हो जाना चाहता है। लेकिन वह एक्सचेंज की वेबसाइट या ऐप पर ऑर्डर ही नहीं दे पा रहा क्योंकि वह एक समय पर लाखों निवेशकों को हैंडल करने में सक्षम नहीं है।

ऐसी शिकायतें हैं कि जब बिटकॉइन का बाजार तेजी या गिरावट पर होता है तो भारत के कुछ एक्सचेंजों में उपभोक्ता लंबे समय तक लॉगिन ही नहीं कर पाते। निवेशकों को भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि अगर उन्होंने कोई धन लगाया है तो उसे लेकर कोई फरार नहीं हो जाएगा। उन्हें आपराधिक कृत्यों, धोखाधड़ी और तकनीकी अक्षमताओं से मुक्त कारोबारी वातावरण मिलेगा और इसमें कोई कमी दिखने पर सरकार तुरंत कार्रवाई करेगी।

पिछले दिनों एक बिटकॉइन एक्सचेंज ने निवेशकों द्वारा अपना धन वापस लेने की प्रक्रिया को कुछ दिन के लिए रोक दिया। फिर कहा कि अब वे बैंक से नहीं बल्कि डिजिटल वॉलेट के जरिए ही धन का ट्रांसफऱ कर पाएंगे। इस ट्रांसफर के लिए या बिटकॉइन के सौदों पर निवेशकों से कितना कमीशन लिया जाएगा, इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। फिलहाल यह एक्सचेंजों की मर्जी पर निर्भर है।

सरकार यह भी साफ करे कि आपराधिक कृत्यों के शिकार निवेशक उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के दायरे में आते हैं या नहीं, और वे उपभोक्ता अदालतों, पुलिस और दूसरी अदालतों की शरण में जा सकेंगे या नहीं। सरकारें जब किसी चीज को लेकर पल्ला झाड़ लेती हैं तो आपराधिक तत्व इसे खुली छूट मान लेते हैं और निवेशक खुद को अपराधी मानते हुए सोचते हैं कि सरकार उन्हें आयकर वसूली के समय ही याद करेगी।

(साई फीचर्स)


डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया इसका समर्थन या विरोध नहीं कराती है।

0 Views.

Related News

(शरद खरे) सिवनी में पुलिस की कसावट के लिये पुलिस अधीक्षक तरूण नायक के द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं।.
गंभीर अनियमितताओं के बाद भी लगातार बढ़ रहा है ठेके का समय (अय्यूब कुरैशी) सिवनी (साई)। इंदौर मूल की कामथेन.
मामला मोहगाँव-खवासा सड़क निर्माण का (अखिलेश दुबे) सिवनी (साई)। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल की महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चर्तुभुज सड़क.
नालियों में उतराती दिखती हैं शराब की खाली बोतलें! (ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। विधानसभा मुख्यालय केवलारी के अनेक कार्यालयों में.
धोखे से जीत गये बरघाट सीट : अजय प्रताप (ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। भाजपा के आजीवन सदस्यों के सम्मान समारोह.
(महेश रावलानी) सिवनी (साई)। बसंत के आगमन के साथ ही ठण्डी का बिदा होना आरंभ हो गया है। पिछले दिनों.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *