किराये के लाईसेंस पर चल रहे मेडिकल स्टोर्स!

 

 

 

स्वास्थ्य विभाग ने फेरीं जिम्मेदारियों की ओर से आँखें

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की कथित अनदेखी के चलते आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में संचालित होने वाले अधिकांश मेडिकल स्टोर्स किसी और के नाम पर हैं पर इनका संचालन कोई और ही कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि घंसौर शहर में एक दर्जन से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स संचालित हो रहे हैं। इनमें क्वॉलिफाईड पर्सन कोई और है और दुकान का संचालन कोई और कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी अगर औचक निरीक्षण कर लें तो उन्हें दुकान में क्वॉलिफाईड पर्सन नहीं मिलेंगे।

लोगों का कहना है कि किराना दुकानों की तर्ज पर घंसौर क्षेत्र में मेडिकल स्टोर्स का संचालन किया जा रहा है। इधर, सूत्रों का कहना है कि मेडिकल स्टोर्स के संचालन के लिये क्वॉलिफाईड पर्सन (जिसके नाम से दुकान का लाईसेंस होता है) का दुकान में मौजद रहना इसलिये आवश्यक है क्योंकि अगर गलत दवा दे दी जाये तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि बिना वैध डिग्री डिप्लोमा के चल रहे मेडिकल स्टोर्स के संचालकों के द्वारा मरीज़ों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा प्रतिबंधित दवाओं का विक्रय भी इन मेडिकल स्टोर्स से धड़ल्ले से किया जा रहा है।

कहा जा रहा है कि भोले भाले ग्रामीणों को इन मेडिकल स्टोर्स के संचालकों के द्वारा कई बार तो एक्सपायरी डेट की दवाएं भी थमा दी जाती हैं। इतना ही नहीं दवा निरीक्षक के द्वारा शायद ही कभी इन दवा दुकानों का निरीक्षण किया गया हो। मेडिकल स्टोर्स में धूल की परत भी साफ दिखायी देती है जिसे नियमों का खुला उल्लंघन माना जा सकता है।

सूत्रों ने आगे बताया कि दुकान के संचालकों के द्वारा ग्राहकों को पक्का बिल देने में भी आनाकानी की जाती है। वे सिर्फ दवा के दाम जोड़कर ग्राहकों से पैसे वसूल कर रहे हैं, जबकि जबसे जीएसटी लागू हुआ है उसके बाद से प्रत्येक स्थानों पर दवाओं के पक्के बिल दिये जा रहे हैं।